'द कश्मीर फाइल्स' की सक्सेस ने यह बात तो साबित कर दी है कि कंटेंट अच्छा हो तो दर्शक खिंचे चले आते हैं। कश्मीर फाइल्स ने बॉक्स ऑफिस पर बवाल मचा दिया है। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस प्रेडिक्शन के सभी मानदंड को तोड़ते हुए पहले दिन 3.5 करोड़ की कमाई की और फिर दूसरे रविवार (20 मार्च) तक आते-आते इसकी कमाई ₹26 करोड़ तक पहुंच गई। कश्मीर फाइल्स की लहर कुछ ऐसी उठी कि इसने बच्चन पांडे, गंगूबाई काठियावाड़ी, राधे श्याम जैसी बड़े बजट की फिल्मों को भी बहा दिया। बच्चन पांडे की कमाई 100 करोड़ मानी जा रही थी लेकिन अब इसका 50 करोड़ तक पहुंचना भी मुश्किल हो गया है।
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द कश्मीर फाइल्स
- फोटो : सोशल मीडिया
इस फिल्म को देखने वाली 61 प्रतिशत ऑडियन्स ऐसी है जो सालों पहले सिनेमाघरों को छोड़कर ओटीटी पर शिफ्ट हो चुकी है। ये दर्शक फिल्म देखने के लिए सिनेमाघर नहीं जाते। कश्मीर फाइल्स के लिए लोगों की भावनाएं इस कदर उमड़ी हैं कि लोग अपने चाहने वाले और रिश्तेदारों से थियेटर जाकर ही फिल्म देखने की अपील करते दिख रहे हैं। फिल्म को मिल रहा राजनीतिक सपोर्ट का भी इसकी अपार सफलता में बेहद योगदान है। अब आप खुद सोचिए जिस फिल्म की तारीफ खुद प्रधानमंत्री मोदी ने की हो उसे किसी प्रमोशन की जरूरत ही कहां है।
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द कश्मीर फाइल्स
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ये पैनडेमिक एरा में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली हिंदी फिल्म बन गई है। कम फिल्में ऐसी होती हैं जो वीकडेज में भी ट्रेंड करें, डबल डिजिट में कमाई करें। द कश्मीर फाइल्स पिछले दो हफ्ते से बॉक्स ऑफिस पर कुछ इसी तरह ट्रेंड कर रही है। इस फिल्म ने उन निर्माताओं का नजरिया भी बदला है जो बड़ी स्टार कास्ट और हाई बजट के पीछे भागते हैं।
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द कश्मीर फाइल्स
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एक रिपोर्ट के मुताबिक 74 मिलियन भारतीयों ने कोरोना काल से पहले यानी 2019 में थिएटर में कम से कम एक हिंदी फिल्म देखी। इनमें से 50% से भी कम दर्शक ऐसे थे जिन्होंने साल में करीब तीन फिल्म तो सिनेमाघर जाकर जरूर देखी। ऐसे दर्शकों को हम रेगुलर की कैटेगरी में रख सकते हैं। इस कैटेगरी में वे दर्शक आते हैं तो साल में कम से कम 2 या तीन फिल्में तो सिनेमाघर जाकर देखते ही हैं। कश्मीर फाइल्स के मामले में सभी आंकड़े फेल साबित हुए, यह सैलाब की तरह आई जिसने लोगों को बड़ी संख्या में थियेटर जाने पर मजबूर किया।
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आपको जानकर हैरानी होगी कि कश्मीर के मुद्दे पर वैसे तो कई फिल्में बनीं लेकिन जो कामयाबी कश्मीर फाइल्स को मिल रही है वो न तो पहले किसी फिल्म को मिली और आने वाले वक्त में मिलती दिखनी की संभावना है। यह पॉलिटिकल नेचर की फिल्म है। एक ओर जहां भाजपा शासित राज्यों में पहले ही यह टैक्स फ्री हो चुकी है, वहीं दूसरी तरफ व्हाट्सएप पर फिल्म देखने की अपील करने वाले मैसेजेस भी वायरल हो रहे हैं। कई जगहों पर लोगों ने थियेटर ही बुक कर दिए हैं। कहीं न कहीं फिल्म की सफलता के पीछे इन सभी तथ्यों का बहुत योगदान है।