जाह्नवी कपूर और ईशान खट्टर की फिल्म धड़क का सबको बहुत ही बेसब्री से इंतजार था। आज वो फिल्म रिलीज हो गई है। करण जौहर के धर्मा प्रोडक्शंस के बैनर तले बनी इस फिल्म के निर्देशक शशांक खेतान हैं। यह फिल्म मराठी भाषा की सुपरहिट फिल्म 'सैराट' की हिन्दी रीमेक है। साल 2016 में आई मराठी ब्लॉकबस्टर फिल्म 'सैराट' जिन्होंने देखी है उन्हें शायद 'धड़क' में कई कमियां नजर आए। आइए आपको बताते हैं किन 5 चीजों से 'सैराट' से अलग है 'धड़क'....
मराठी फिल्म सैराट के लीड हीरो आकाश ठोसर (परश्या) को फिल्म में काफी गरीब दिखाया गया है। इतना ही नहीं उसे नीचे तबके का भी दिखाया गया है बिल्कुल गरीब जिसके परिवार के पास सही से खाने के पैसे भी नहीं होते थे। वहीं 'धड़क' में ईशान खट्टर (मधुकर) को एक मध्य वर्गीय परिवार का बेटा दिखाया गया है। ईशान के पिता उदयपुर में एक लेकसाइड रेस्तरां के मालिक होते हैं और परिवार बड़ी ही खुशी के साथ रहता है।
फिल्म 'सैराट' एक लव स्टोरी के साथ साथ म्यूजिकल कहानी है जहां हर तरफ प्यार के गीत गूंजते नजर आते हैं लेकिन 'धड़क' में इसकी कमी नजर आई है। लव स्टोरी होने के बावजूद फिल्म में म्यूजिक और गानों की कमी है। प्यार की बातों को अक्सर गानों से समझाया जाता है लेकिन 'धड़क' में इसकी कमी खली है। वहीं 'सैराट' के मराठी गानों ने सबके दिल को जीत लिया था।
फिल्म 'सैराट' में प्यार को बाकी सब चीजों से ज्यादा अहमियत दी गई थी जबकि 'धड़क' में प्यार के अलावा दूसरे चीजों पर भी ध्यान दिया गया है। करण जौहर की फिल्मों में ड्रामा होना जरूरी होता है और ऐसा ही 'धड़क' के साथ भी हुआ है। फिल्म को कई जगहों पर लव स्टोरी से हटाकर इधर उधर के ड्रामे से भरा गया है। कई घटनाएं ईशान और जाह्नवी की लव स्टोरी पर भारी पड़ी हैं। दोनों में प्यार होने के बावजूद कई कमियां नजर आई हैं।
फिल्म 'धड़क' की कहानी बाकी लव स्टोरीज की तरह ही साधारण है। फिल्म में कुछ नयापन देखने को नहीं मिला। जाह्नवी और ईशान की लव स्टोरी के बीच विलेन बनता है जाह्नवी का परिवार लेकिन 'सैराट' में परश्या और आर्ची के प्यार के खिलाफ उनका पूरा समाज होता है क्योंकि परश्या दलित होता है और ये ही उसका सबसे बड़ा गुनाह होता है।