गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज है सुनील दत्त की इस फिल्म का नाम, नरगिस ने निभाया था खास किरदार

बीबीसी हिंदी Published by: anand anand Updated Mon, 25 May 2020 09:25 AM IST
सुनील दत्त पुण्यतिथि- फिल्म यादें से जुड़ा सुनील दत्त का दृश्य
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भारतीय सिनेमा का इतिहास काफी लंबा है। सिनेमा के इस इतिहास को स्वर्णिम करने में कई लोगों का अहम योगदान भी है। ऐसे ही एक अभिनेता थे सुनील दत्त, जिन्होंने 25 मई 2005 को इस दुनिया को अलविदा कह दिया, लेकिन सिनेमा और उनके चाहने वाले कभी सुनील को भुला न पाएंगे। वैसे तो सुनील दत्त के बारे में कई किस्से और बातें आप जानते ही होंगे लेकिन क्या आप जानते हैं कि सुनील दत्त ने एक ऐसी फिल्म बनाई थी जिसका नाम 'गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' में भी दर्ज है।

दरअसल भारत में एक ऐसी फिल्म बन चुकी है जिसने रिकॉर्ड बनाया क्योंकि उस फिल्म में एक ही एक्टर था। वो एक्टर थे सुनील दत्त, जो फिल्म 'यादें' के निर्माता- निर्देशक भी थे। ये फिल्म 1964 में रिलीज हुई और ये एक ब्लैक एंड व्हाइट फिल्म थी। फिल्म की शुरुआत में ही लिखा आता है- वर्ल्ड्स फर्स्ट वन एक्टर मूवी।
फिल्म यादें
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इस फिल्म में सुनील दत्त का किरदार घर आता है और देखता है कि उसकी पत्नी और बच्चे घर पर नहीं। उसको लगता है वो उसको छोड़ कर चले गए। आगे जब वो अकेला होता है, खुद से बातें करता है, वक्त में पीछे जाता है, आसपास की चीजों से बात करता है और कहानी आगे बढ़ती है। फिल्म में नरगिस की आवाज सुनाई देती है।

क्यूरेटर, फिल्म इतिहासकार और लेखक अमृत गंगर कहते हैं, "इस फिल्म में जो भी दिखाया गया वो अकेलेपन का अहसास दिखाने की कोशिश है। क्या होता है उस किरदार के साथ जब वो घर आता है और उससे लगता है कि पत्नी और बच्चे उसको छोड़ कर चले गए। वो अपने आसपास पड़े सामान से बातें करता है और वो कहीं ना कहीं अहसास में जीवित हो उठते हैं।"
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सुनील दत्त
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पूरी फिल्म को अपने कंधे पर रख कर दर्शक को अपने साथ रखना एक चुनौती है। अमृत गंगर कहते हैं, "इस फिल्म में जो हुआ अगर उसे तकनीक के लिहाज से देखें तो ये इससे पहले नाटक और रंगमंच में होता रहा है। बल्कि थियेटर में ये और मुश्किल होता है क्योंकि ऑडियंस वहां मौजूद होती है और अकेले आपको सब संभालना है और कोई रीटेक नहीं।"
फिल्म यादें
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इस फिल्म को एक बात और खास बनाती है। ये फिल्म जहां सच में आपका ध्यान खींचेगी वो है कि औरतों की समाज में, अपने परिवार में जगह क्या है। आवाज और डायलॉग के जरिए पति-पत्नी मे बहस होती है, एक दूसरे के चरित्र पर लांछन लगते हैं और आदमी का किरदार अपना रोब दिखाता है। फिल्म की शुरुआत में ही लिखा आता है- जिस घर में नारी का सम्मान होता है उस घर में देवता निवास करते हैं।
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फिल्म यादें में सुनील दत्त
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फिल्म में जब पति-पत्नी की बहस दिखाई जाती है, तो पत्नी नजर नहीं आती, सिर्फ उसकी आवाज सुनाई देती है, वो आवाज होती है नरगिस की। नरगिस फिल्म के एंड में भी छाया या परछाईं के रूप में नजर आती है। नरगिस घर आती है और देखतीं है उनके पति ने फांसी लगा ली। क्या सुनील बच जाते हैं, क्या सब ठीक हो जाता है, भावनाओं की कहानी जिसे अलग ढंग से पेश किया गया था। इस फिल्म में दो गाने भी हैं।

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