मणिरत्नम की फिल्म रावण और रोहित शेट्टी की फिल्म चेन्नई एक्सप्रेस में अपनी मोहक झलकियां दिखा चुकीं प्रियमणि जल्द ही अजय देवगन के साथ फिल्म मैदान में नजर आएंगी। प्रियमणि से लॉकडाउन के दौरान ये खास बातचीत की पंकज शुक्ल ने।
Lockdown Interview: ‘मैदान’ की हीरोइन का खुलासा, 'मेरा तो पिटाई के बिना दिन ही नहीं पूरा होता था'
हम पिटे बहुत हैं। मतलब दिन भर में कुछ भी हो, एक दो तो पड़ना ही है। घर में मैं और मेरे बड़े भाई हम दो ही बच्चे थे। भाई तो बहुत पढ़ाकू किस्म के थे और मैं तो उनकी 30 पर्सेंट भी होती तो बहुत खुश होती थी। मैं ज्यादा पढ़ती लिखती नहीं थी। पढ़ाई में मैं सिर्फ पास भी हो जाती थी तो भी मेरी मां और पिता बहुत खुश होते थे। फिर भी बोलते थे कि थोड़ा तो पढ़ो। कम से कम इसके जैसा तो पढ़ो। मेरी मां मुझे थोड़ा ज्यादा मारती थीं।
और, आजकल के बच्चों और अभिभावकों में क्या फर्क देखती हैं। लॉकडाउन में भतीजे-भतीजियों से भी बातें करने का मौका मिल रहा होगा?
हमारे क्षेत्र में या बिजनेस के क्षेत्र में लोगों के पास अपने बच्चों को देने के लिए समय ही नहीं होता। लेकिन अब ऐसा हो गया है कि अब पूरा वक्त परिवार को ही देना पड़ता है। यह दरअसल भगवान का ही बनाया खेल है। मेरी एक कजिन है। उसकी बेटी है। जब उससे मैं बात करती हूं तो बताती है कि वह खेलने में मस्त रहती है। कार्टून देखती है। और आजकल मैं वीडियोज भी बहुत देख रही हूं जहां मैं देख रही हूं कि माता-पिता अपने बच्चों को हर चीज में घुलने मिलने के लिए बोलते हैं। वह उनसे पेंटिंग ड्राइंग करवाते हैं और रसोई घर में भी मदद करने के लिए बोलते हैं। वह उन्हें बस व्यस्त रखना चाहते हैं। ये अच्छा है।
और, आपको भी अपने पति मुस्तफा के साथ लंबा वक्त बिताने को मिला?
जी, इस समय को हम दोनों खुशी के साथ बिता रहे हैं। हम दोनों एक साथ बैठकर फिल्में देखते हैं, वेब सीरीजें देखते हैं। जब लॉकडाउन खत्म हो जाएगा तो वह अपने काम में व्यस्त हो जाएंगे और मैं अपने काम में व्यस्त हो जाऊंगी। फिर ऐसा वक्त वापस कब आएगा और एक साथ समय बिताने को कब मिलेगा? पता नहीं।
वेब सीरीज 'द फैमिली मैन' में भी आपने मां का किरदार निभाया है। आपकी परवरिश में और इस कहानी में आपके बच्चों की परवरिश में क्या फर्क देखती हैं?
आजकल माता पिता और बच्चे एक साथ दोस्त बनाकर रह रहे हैं। मां-बेटी, मां-बेटा, पिता-बेटा सब साथ मिल बैठ रहे हैं, बातचीत करते हैं, खेल रहे हैं। मैं इस लॉकडाउन परिस्थिति की बात कर रही हूं जिसमें पिता बेटा, मां बेटा सब एक दूसरे के करीब आ रहे हैं। जिस तरह मेरी परवरिश हुई है और आज कल जैसे बच्चों की परवरिश होती है उसमें बहुत अंतर है। मेरा तो पिटाई के बिना दिन ही नहीं पूरा होता था।
मणिरत्नम को तो आप जानती होंगी लेकिन शाहरुख खान की फिल्म चेन्नई एक्सप्रेस के गाने वन टू थ्री फोर के लिए जब आपको बुलावा आया तो क्या रिएक्शन था?
मेरे पास सबसे पहले रोहित शेट्टी के ऑफिस से फोन आया। उधर से बोला गया कि मैं रोहित शेट्टी के ऑफिस से बात कर रहा हूं। और रोहित शेट्टी आपसे मिलना चाहते हैं। मैंने समझा कि कहीं यह कोई बुद्धू तो नहीं बना रहा। मैंने सच्चाई का पता लगाने के लिए अपने मैनेजर को वह नंबर दिया और मेरे मैनेजर ने मुझे पांच मिनट बाद फोन करके बताया कि हां, ये सही फोन था। फिर मैं अपने मैनेजर के साथ मुंबई आई और आकर रोहित शेट्टी से मिली।
शाहरुख के साथ काम करने के बाद उनकी शख्सीयत की ऐसी कोई चीज जिसने आपको बहुत प्रभावित किया हो?
दिनभर शूटिंग करने के बाद हर इंसान थक जाता है। जब आपने दिनभर शूटिंग की हो और आपको आठ साढ़े आठ बजे से फिर से रात में एक गाना शूट करना हो तो इंसान थक ही जाता है। लेकिन शाहरुख ऐसे थे कि दिनभर शूटिंग करने के बाद वह अपनी वैनिटी वैन में जाते थे और नहा धोकर फ्रेश होकर फिर से वापस आ जाते थे और उतनी ही ऊर्जा के साथ फिर से काम पर लग जाते थे। हम सुबह पांच साढ़े पांच तक शूटिंग किया करते थे तब तक वह उसी ऊर्जा के साथ लगे रहते थे। जैसे ही निर्देशक पैकअप बोलते, हम तुरंत भाग जाते थे। लेकिन शाहरुख फिर भी वहां कोरियोग्राफर और उनके सहायकों को पकड़कर पूछते थे कि अगले दिन के डांस स्टेप क्या रहेंगे? और वह उसी वक्त रिहर्सल भी किया करते थे। इतनी मेहनत करने का ये गुण मैं जरूर उनसे लेना चाहूंगी।
और, अजय देवगन?
अजय सर की मैंने इतनी सारी फिल्में देखी हैं। गोलमाल हुई या फिर अभी आई 'तानाजी' हुई। उन्होंने इन फिल्मों में कमाल का काम किया है। अपना दो सौ फीसदी दिया है। कोई भी उनकी उपलब्धियों से तुलना नहीं कर सकता। फिल्म मैदान में मैं उनके साथ काम करके बहुत खुश हूं। यह मेरे लिए सम्मान की बात है। मैं फिल्म के निर्माता बोनी कपूर और निर्देशक अमित शर्मा को भी धन्यवाद देती हूं।
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