अभिनेता, निर्माता, निर्देशक राजीव कपूर के निधन के सदमे से कपूर खानदान को उबरने में अभी समय लगेगा। राजीव कपूर दिल का दौरा पड़ने की वजह से मंगलवार को अचानक चल बसे। उनके करीबी बताते हैं कि वह बरसों से घुट घुट कर जी रहे थे और अपनी बात बमुश्किल चंद ही लोगों के साथ साझा कर पाते थे। उनके जाने के बाद ऋषि कपूर की उनसे बनी दूरी के अलावा लोगों को उनमें उनके चाचा शम्मी कपूर की झलक दिखने की बातें भी फिर से दोहराई जा रही हैं।
एक लंबा अरसा फिल्मों में बिताने के बाद राजीव अपने हाल के दिनों में फिल्मों और मीडिया की चमक-धमक से काफी दूर रह रहे थे। राज कपूर के भाई और अपने चाचा शम्मी कपूर से जुड़ी कई यादों का बखान राजीव ने अपने एक साक्षात्कार में किया था। उन्होंने तब बताया था कि वो उनके साथ फिशिंग पर जाया करते थे। कश्मीर की एक याद को ताजा करते हुए राजीव ने कहा था कि एकबार वह अपने चाचा शम्मी कपूर के साथ कश्मीर की झील में मछलियां पकड़ने भी चले गए थे।
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राजीव कपूर
- फोटो : Bollywood
राजीव अपने चाचा शम्मी कपूर के बड़े प्रशंसकों में से एक थे। राजीव बचपन से ही शम्मी कपूर के फैशन, उनकी इंपोर्टेड गाड़ियों के बारे में कहानियां सुनकर बड़े हुए। यूं तो शम्मी कपूर की सूरत और अभिनय की दीवानगी आज भी लोगों के दिलों में घर किए बैठी है पर इन्ही वजहों से परेशान होने वाला कोई और नही उनके अपने भतीजे राजीव कपूर थे।
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परिवार संग राजीव कपूर
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राजीव कपूर ने एक साक्षात्कार में बताया था कि कैसे उन्हें अपने चाचा शम्मी कपूर के करीब कबीर हमशक्ल होंने की वजह से कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। दरअसल कई फिल्में जो राजीव कपूर को मिला करतीं उन फिल्मों में उनका किरदार हूबहू शम्मी कपूर के निभाए गए किरदारों से प्रेरित होता था। उनका मानना था कि ऐसा सिर्फ इसलिए होता था क्योंकि उनकी शक्ल उनके चाचा शम्मी कपूर से बहुत मिलती-जुलती थी जिसकी वजह से किरदार भी उनके जैसा ही मिला करता।
राजीव ने तब ये भी बताया था कि बहुत से ऐसे फिल्म निर्देशकों ने अक्सर मेरे किरदारों को वैसा ही बनाया जैसा उन्होंने शम्मी कपूर के लिए बनाया था। ये वे निर्देशक थे जो पहले शम्मी अंकल के साथ काम कर चुके थे। राजीव खुद अपने चाचा शम्मी कपूर की लाइफ स्टाइल और अभिनय के बड़े प्रशंसकों में से एक थे लेकिन राजीव का मानना था कि शम्मी कपूर का हमशक्ल होने की वजह से वह कुछ नया नही कर पाएं और अपनी क्षमता को तराशने में पीछे रह गए। उनका मानना था कि जवानी के दिनों में उन्हें इन चीजो की उतनी समझ नहीं थी और इसी वजह से वह किरदारों का सही चयन नही कर पाए।