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ऐतिहासिक RK Studio का LOGO बनाने के पीछे है ये दिलचस्प कहानी, इसके पीछे था राज कपूर का दिमाग
Mon, 27 Aug 2018 03:45 PM IST
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Updated Mon, 27 Aug 2018 03:45 PM IST
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आरके स्टूडियो
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हिंदी फिल्मों के इतिहास को खुद में समेटे मशहूर आरके स्टूडियो अब इतिहास बनने जा रहा है। कपूर परिवार ने 70 साल पुराने इस स्टूडियो को बेचने का फैसला कर लिया है। परिवार का कहना है कि पिछले साल आग लगने के बाद इसका पुनर्निर्माण कराना आर्थिक रूप से व्यावहारिक नहीं है। इस स्टूडियो में बनी आखिरी फिल्म ‘आ अब लौट चलें’ थी ।
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आरके स्टूडियो
हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता राज कपूर ने मुंबई के चेंबूर में 1948 में इस स्टूडियो की स्थापना की थी। पिछले साल 16 सितंबर को सुपर डांसर शो के दौरान इसमें आग लग गई थी, हालांकि कोई हताहत नहीं हुआ था। ऋषि कपूर ने नई तकनीक के साथ इसके पुनर्निर्माण की इच्छा जाहिर की थी, लेकिन उनके बड़े भाई रणधीर कपूर ने कहा कि यह व्यावहारिक नहीं होगा।
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आर.के.स्टूडियो लोगो
अब जब ये ऐतिहासिक स्टूडियो बिकने जा रहा है तो इसके 'लोगो' का बेहद रोचक किस्सा जान लेते हैं । एक महान पेंटर रिनी फ्रेंक्वाइस जेवियर ने रसियन लेखक लियो टॉलस्टाय के 'रुत्जर सोनाटा' नाम के नोवेला से इस थीम को लिया था । नोवेला यानि एक ऐसी कृति जो नॉवेल के मुकाबले छोटी मगर शार्ट स्टोरीज के मुकाबले बड़ी हो। नोवेला एक बेहद रोमांटिक कहानी पर आधारित है। इसमें द्वंद्व भी थे तो कई सवाल भी।
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AAG, RK Studio
- फोटो : RK Studio
टॉलस्टाय ने इस नोवेला को 1889 में लिखा था इससे प्रेरित होकर रिनी फ्रेंक्वाइस जेवियर ने 1901 में बनाई पेंटिंग बनाई थी। हालांकि आरके स्टूडियो ने कभी इस बात को दर्ज नहीं किया मगर जब आप इस पेंटिंग को देखेंगे तो एहसास होगा कि आरके स्टूडियो का लोगो और ये पेंटिगं एक दूसरे की कार्बन कॉपी हैं। जरूर इस पेंटिंग पर राजकपूर की नजर पड़ी होगी और उन्हें लगा होगा इससे बेहतर लोगो हो ही नहीं सकता।
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आरके स्टूडियो
आरके स्टूडियो की स्थापना भारत की आजादी के ठीक एक साल बाद 1948 में हुई थी। फिल्म इंडस्ट्री को ये नायाब तोहफा दिया था सुपरस्टार राजकपूर ने। एक से एक बेहतरीन फिल्मों की झड़ी लगाने वाला ये आरके स्टूडियो भारत के लिए किसी धरोहर से कम नहीं है।
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