बला की खूबसूरती और गजब की सुरीली आवाज का मनमोहक संगम मानी जाने वालीं नूर जहां (Noor Jehan) का असली नाम अल्लाह राखी वसाई था। 1930 से 1990 तक यानी सात दशक तक अपनी जादुई आवाज से दर्शकों का दिल जीतने वालीं नूर जहां को पाकिस्तान में मल्लिका-ए-तरन्नुम (Malika e Tarannum) का खिताब मिला था। 21 सितंबर 1926 को पैदा हुईं नूरजहां ने 23 दिसंबर 2000 को आखिरी सांस ली। आज नूर जहां की जयंती है।
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नूर जहां
- फोटो : twitter- @BombayBasanti
बंटवारे के बाद नूर जहां पाकिस्तान चली गईं। उस वक्त वह भारत की बहुत मशहूर गायिका और अभिनेत्री थीं। ‘दोस्त’, ‘जीनत’, ‘बड़ी मां’, ‘जुगनू’, ‘ख़ानदान’ जैसी फिल्मों से वो भारत के घर घर में जानी-पहचानी जाती थीं। नूर जहां ने महान बनने के लिए बहुत मेहनत की थी और अपनी शर्तों पर जिंदगी को जिया था। उनकी जिंदगी में अच्छे मोड़ भी आए और बुरे भी, उन्होंने शादियां कीं, तलाक दिए, प्रेम संबंध बनाए, नाम कमाया और अपनी जिंदगी के अंतिम क्षणों में बेइंतहा तकलीफ भी झेली।
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बीबीसी के एक लेख के मुताबिक फरीदा खानम जो कि नूर जहां की दोस्त थीं। उन्होंने कहा था कि नूर जहां की कार जब लड़कों के सामने से गुजरती थी तो थोड़ी धीमी हो जाया करती थी। ताकि ये दोनों मशहूर गायिकाएं उन नौजवान लड़कों को जी भर के देख सकें। गाना रिकॉर्ड करते समय नूर जहां उसमें अपना दिल, आत्मा और दिमाग सब कुछ झोंक देती थीं। हर नौजवान लड़के को देख उनका दिल धड़कने लगता था।
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नूर जहां
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बंटवारे के बाद पाकिस्तान जाने पर उनकी गायकी ने नई बुलंदियों को छुआ। नूर जहां और नजर मोहम्मद के किस्से आज भी मशहूर हैं। कहा जाता है पाकिस्तान के टेस्ट क्रिकेटर नजर मोहम्मद का टेस्ट करियर वक्त से पहले ही नूर जहां की वजह से खत्म हो गया। कहा जाता है कि एक बार उनको और नजर मोहम्मद को उनके पति ने एक कमरे में रंगे हाथ पकड़ लिया था। तब नजर ने पहली मंजिल की खिड़की से नीचे छलांग लगा दी, जिसकी वजह से उनका हाथ टूट गया। ऐसे में उन्हें वक्त से पहले ही टेस्ट क्रिकेट से रिटायर होना पड़ा।
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बीबीसी के मुताबिक जब 1998 में नूर जहां को दिल का दौरा पड़ा, तो उनके एक मुरीद और नामी पाकिस्तानी पत्रकार खालिद हसन ने लिखा था- "दिल का दौरा तो उन्हें पड़ना ही था। पता नहीं कितने दावेदार थे उसके! और पता नहीं कितनी बार वह धड़का था, उन लोगों के लिए जिन पर मुस्कराने की इनायत की थी उन्होंने।"