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मंटो के कलेक्शन से नंदिता नाराज, हिंदी फिल्म वितरण की व्यवस्था पर उठाए सवाल

Wed, 26 Sep 2018 12:07 PM IST
मनोरंजन डेस्क,अमर उजाला
मनोरंजन डेस्क,अमर उजाला Updated Wed, 26 Sep 2018 12:07 PM IST
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manto movie collection review: Nandita is angry with the collection of Manto,
manto

मंटो को दुनिया भर के दर्जनों फिल्म महोत्सवों में पुरस्कार और सराहना मिली, लेकिन जब बीते शुक्रवार को फिल्म को सुबह सिनेमाघरों में पहुंचना था तो वह नहीं पहुंची। कहा गया कि कुछ तकनीकी कारणों से ऐसा हुआ। यह भी आया कि वितरकों और फिल्म प्रसारित करने वाली कंपनी के बीच कागजी कार्यवाही पूरी नहीं हो सकी। कुछ गलतहफमियां आड़े आ गई जो शाम तक सुलझी। तब फिल्म को रात और देर रात के शो कुछ शहरों में मिले। पहले ही दिन लगे इस जोरदार झटके ने मंटो की संभावनाओं को बॉक्स ऑफिस पर खत्म कर दिया। पहले दिन मात्र 45 लाख रुपये का कलेक्शन था। शनिवार-रविवार को फिल्म ने डेढ़ करोड़ रुपये कमाए और इस तरह पहला वीकेंड दो करोड़ से थोड़ा कम ही रहा।

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अब फिल्म की निर्देशक नंदिता दास नाराज हैं और उन्होंने मीडिया में एक खुला पत्र लिख कर हिंदी फिल्म वितरण की व्यवस्था को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने फिल्मी दुनिया के लोगों की उस मानसिकता को भी गलत ठहराया है जो पहले से तय कर लेती है कि कौन सी फिल्म बॉलीवुड की और कौन सी कुछ खास दर्शकों के लिए है। उन्होंने लिखा है कि मंटो इस बात को समझने का अच्छा उदाहरण बन चुकी है कि कैसे पूर्वाग्रह से ग्रस्त बॉलीवुड के वितरक और सिनेमाघरों के मालिक किसी अच्छी फिल्म की संभावनाओं को टिकट खिड़की पर खत्म कर देते हैं। नंदिता के अनुसार बॉलीवुड के लेबल वाली फिल्में औसत भी हों तो उन्हें 2000 स्क्रीन मिल जाते हैं जबकि मंटो जैसी फिल्म को 500 स्क्रीन नहीं मिलते। 

उल्लेखनीय है कि नवाजुद्दीन सिद्दिकी स्टारर मंटो के साथ शाहिद कपूर-श्रद्धा कपूर की बत्ती गुल मीटर चालू फिल्म रिलीज हुई थी। नंदिता ने कहा है कि यह फिल्मी दुनिया के लोगों का अहंकार है कि वह पहले से तय कर लेते हैंए फलां फिल्म दर्शक समझ सकेंगे और फलां फिल्म को नहीं समझ पाएंगे। नंदिता के अनुसार फिल्म महोत्सवों में मंटो को बहुत अच्छा रेस्पॉन्स मिला और इस बात की खबर से भारत में लोगों की इसके प्रति काफी उत्सुकता थी। 

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नवाजुद्दीन, नंदिता दास - फोटो : File Pic

गूगल ट्रेंड से भी यह बात पता चलती थी कि मंटो के आस पास रिलीज हो रही फिल्मों से ज्यादा दर्शक इसके लिए उत्साही थी। इसके बावजूद फिल्म के वितरकों ने अमृतसर और श्रीनगर जैसे शहरों में रिलीज नहीं किया, जहां मंटो बड़े हुए और उनकी जबर्दस्त फैन फॉलोइंग है। नंदिता ने इस बात की भी शिकायत की है कि जहां मंटो को रिलीज भी किया गया है तो इसके शो टाइम बहुत सुबह या फिर देर रात के दिए गए। जबकि सुविधाजनक दिन के शो से मंटो को आमतौर पर बाहर रखा गया। इससे जो लोग यह फिल्म देखना चाहते थे, वह नहीं देख सके।

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नंदिता के मुताबिक सच्चाई यह है कि आज बॉलीवुड की मसाला फिल्मों से इतर फिल्में बनाने वाले निर्माता-निर्देशक खुद को असहाय महसूस करते हैं। अगर आपके पास अपना वितरण या मार्केटिंग सिस्टम न हो तो आप कुछ नहीं कर सकते। नंदिता मानती हैं कि आज फिल्म और उसके दर्शकों के बीच में बहुत सारे बिचौलिये आ चुके हैं, जो तय करते हैं कि कौन लोग कौन सी फिल्म देखेंगे और कौन सी नहीं। उन्होंने कहा कि फिल्में हमेशा से कला थीं और रहेंगी। यह साइंस नहीं है कि कुछ लोग यह दावा करें कि वे इसके सारे फार्मूले जानते हैं।

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