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रफी और किशोर के लिए जो नहीं था मुमकिन वो महारत मन्ना डे को थी हासिल, जेल भेजना चाहती थी पुलिस
एंटरटेनमेंट डेस्क अमर उजाला
Published by: Mishra Mishra
Updated Thu, 24 Oct 2019 07:05 AM IST
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Manna Dey
- फोटो : सोशल मीडिया
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मन्ना डे भारतीय संगीत की दुनिया की एक जानी मानी हस्ती है, उन्होंने 50-60 के दशक में कई बड़े स्टारों की फिल्म को आवाज दी है। उस दौर में किसी फिल्म में कोई गीतकार के रूप में मन्ना डे पहली पसंद हुआ करते थे। आज मन्ना डे की पुण्यतिथि पर है।
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- फोटो : file photo
मन्ना डे का जन्म 1 मई 1919 को कोलकाता में हुआ था। उन्होने स्कॉटिश चर्च कॉलेजिएट स्कूल, स्कॉटिश चर्च कॉलेज तथा विद्यासागर कॉलेज से पढ़ाई पूरी की। 1942 में मन्ना पहली बार अपने चाचा प्रसिद्ध संगीतकार कृष्णाचंद्र डे के साथ मुंबई आए और संगीत का सफर शुरू किया। मन्ना डे को पहली बार 1950 में आई फिल्म मशाल में अकेले गाने का मौका मिला। इसके बाद 1952 में उन्होंने 1952 में मराठी और बांग्ला फिल्मों में भी गाने गाए।
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मन्ना डे की आवाज का असर कुछ ऐसा था कि लोगों कहते थे मोहम्मद रफी और किशोर कुमार के किसी भी गाने को मन्ना डे बड़े ही आराम से गा सकते थे, लेकिन मन्ना डे के गाए गाने को आवाज दे पाना रफी और किशोर कुमार के लिए मुमकिन नहीं था।
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अपने करियर में चार हजार से ज्यादा गाना गाने वाले मन्ना डे हिन्दी फिल्मों के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना के फैन थे। उनका मानना था कि जितनी खूबसूरती से राजेश खन्ना गानों पर परफॉर्म करते हैं, वैसा कोई और नहीं कर सकता। फिल्म 'आनंद' का गाना 'जिंदगी कैसी है पहेली' को राजेश खन्ना पर फिल्माया गया था। इसे मन्ना डे ने गाया था।
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लखनऊ में एक प्रोग्राम में परफॉर्म करने गए मन्ना डे के जेल जाने तक की नौबत आ गई थी। दरअसल, चारबाग रलेवे स्टेशन के पास एक संगीत समारोह का आयोजन होना था। कार्यक्रम के लिए दर्शक इंतजार कर रहे थे और उधर आयोजक रफूचक्कर हो गए थे।
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