बॉलीवुड में जब भी विलेन का नाम लिया जाता है तो कई आइकॉनिक नाम खुद ब खुद सामने आ जाते हैं। इन्हीं विलेन में से एक हैं जीवन। जीवन के वाकई रूप निराले होते हैं, इसी तरह इस 'जीवन' के भी रूप निराले थे। जीवन कई फिल्मों में विलेन बने लेकिन उनका अंदाज हर फिल्म में बेहद निराला रहा है। विलेन के अलावा जीवन का एक रूप और था और वो था नारदमुनि का।
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जीवन
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जीवन का असली नाम ओंकार नाथ धर था। जीवन बॉलीवुड के पहले नारदमुनि थे। इतना ही नहीं बल्कि उन्होंने अपने फिल्मी करियर में 49 बार नारदमुनि का किरदार निभाया है। ये बात खुद ही जीवन ने अपने एक इंटरव्यू के दौरान बताई थी। बड़े पर्दे पर नारदमुनि का किरदार जीवन ने ही सबसे अधिक बार निभाया जिसमें उन्हें खूब पसंद भी किया गया।
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इस किरदार से जुड़ा एक एक्सपीरियंस भी उन्होंने इंटरव्यू के दौरान साझा किया था। जीवन ने बताया था कि उस दौर में एक मराठी न्यूज पेपर ने उनके बारे में एक आर्टिकल लिखा था। इस आर्टिकल में लिखा गया था कि अगर आकाश से असली नारद उतरकर आ जाएं और वो जीवन जी की तरह नारायण, नारायण, नारायण ना बोले तो हम उसे बहरूपिया समझेंगे। जो नारद बनकर हमारे सामने आ गया है।
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जीवन
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इसी दौरान जब उनसे पूछा गया कि 'सालों से आप विलेन का किरदार निभा रहे हैं। जाहिर सी बात है कि ज्यादती जिंदगी में भी इसका असर पड़ा ही होगा? इस सवाल के जवाब में जीवन ने कहा, 'हां ज्यादती जिंदगी बड़ी सुकून भरी और उम्दा हो गई। क्योंकि स्टूडियो में विलेन बनकर अपनी बहन की चूड़ियां बेचकर उसकी शराब पी लेना। अपने बूढ़े बाप को धक्के मारकर निकाल देना। अपनी बड़ी बहन को जो पहले से ही अंधी है उसे सीढ़ी से धक्का दे देना। गली में इधर उधर नजरबाजी कर लेना। किसी को रिवॉल्वर से मार देना, किसी का थप्पड़ खा लेना। पूरे दिन इतनी बुराइयां कर ली जाती हैं। तो घर आकर बच्चों और बीवी का खिलता हुआ चेहरा देखकर सुकून मिल जाता है।'
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आगे उन्होंने कहा कि 'जिस दिन शूटिंग नहीं होती उस दिन मुझे बहुत अच्छा लगता है। क्योंकि मेरे बच्चे उस दिन मुझे हीरो समझते हैं।' गौरतलब है कि जीवन ने अपने करियर की शुरुआत मोहनलाल की फिल्म फैशनेबल इंडिया से की थी। लेकिन उन्हें पहचान 1935 से आई फिल्म रोमांटिक इंडिया से मिली। जीवन को स्टेशन मास्टर, अफसाना, अमर अकबर एंथनी, नागिन, शबनम, हीर रांझा जैसी फिल्मों से अच्छी पहचान मिली है।
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