विशाल भारद्वाज, जो इन दिनों अपनी फिल्म 'रंगून' को लेकर चर्चा में हैं, उनका कहना है कि हिंदी सिनेमा में सिर्फ फिल्ममेकर ही है जिसके पास भावुक तौर पर कोई सुरक्षा नहीं होती और वो नेकेड महसूस करता है।
'हिंदी सिनेमा में भावुक तौर पर फिल्ममेकर असुरक्षित होता है'
'रंगून' इस शुक्रवार को रिलीज होने जा रही है लेकिन उससे पहले ही ये विवादों में फंस गई है। जहां सेंसर बोर्ड की वजह से फिल्म में अभी तक 70 बदलाव किए जा चुके हैं वहीं इस फिल्म के निर्देशक पर कहानी चोरी का भी आरोप लगा है।
विशाल भारद्वाज का कहना है कि फिल्मी परदे पर चाहे हीरो-हीरोइन काम कर रहे हों, लेकिन असल में फिल्ममेकर को ही हर चीज़ के लिए जिम्मेदार माना जाता है क्योंकि एक फिल्ममेकर किसी भी सीन को अपने नजरिए से बुनता और लिखता है, जबकि हीरो-हीरोइन का काम होता है कि वो उस सीन को फिल्मी परदे पर उसी तरह से उभारे जैसा फिल्ममेकर चाहता है। लेकिन अगर कोई गलती हो जाए तो उसके लिए फिल्ममेकर को ही जिम्मेदार ठहराया जाता है।
विवादों में फंसी विशाल भारद्वाज की 'रंगून'
विशाल भारद्वाज कहते हैं, 'सीन सिर्फ बुनने और लिखने तक ही सीमित नहीं है। बल्कि किस तरह उस सीन को शूट किया जाना है जिससे कि वो रियल लगे और किस तरह किसी सीन को रियल बनाने के लिए हीरो-हीरोइन शूट करें, ये सब देखना और चित्रित करना फिल्ममेकर का काम होता है। हर सीन को बुनने में काफी मेहनत करनी पड़ती है।
'रंगून' द्वितीय विश्व युद्ध की पृष्ठभूमि पर आधारित है। इसमें कंगना रानौत, शाहिद कपूर और सैफ अली खान नजर आएंगे।