वेब सीरीज ‘तांडव’ को लेकर मुंबई में मचे कोहराम का असर रविवार को गोवा में दिखाई दिया। 51वें इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया यानी इफ्फी के समापन में हिंदी सिनेमा का कोई बड़ा सितारा नहीं पहुंचा। आयोजकों ने जीनत अमान और रवि किशन को सम्मानित कर किसी तरह अपनी नाक बचाई। इस साल डेनमार्क की फिल्म 'इनटू द डार्कनेस' ने स्वर्ण मयूर पुरस्कार जीता है।
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रवि किशन
- फोटो : सोशल मीडिया
51वें इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया का समापन बीते रविवार को हुआ। समापन समारोह में जीनत अमान और रवि किशन मुख्य अतिथि बनकर पहुंचे जिसमें जीनत अमान को गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत और रवि किशन को उच्च शिक्षा विभाग के सचिव अमित खरे ने सम्मानित किया। इस फिल्म फेस्टिवल में डेनिश भाषा की फिल्म 'इनटू द डार्कनेस' को गोल्डन पीकॉक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। द्वितीय विश्व युद्ध पर आधारित इस फिल्म का निर्देशन एंडर्स रिफन ने किया है।
फिल्म 'इनटू द डार्कनेस' द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान डेनमार्क के लोगों पर आई आपदा को दर्शाती है। निर्देशक एंडर्स ने फिल्म में भावनाओं और उस समय की परेशानियों को काफी अच्छे से दर्शाया है। यह वह वक्त था जब नाजी डेनमार्क पर कब्जा कर रहे थे और डेनमार्क के लोग दिक्कतों का सामना कर रहे थे। इस फिल्म को 51वें इफ्फी समारोह में 40 लाख रुपये के नकद पुरस्कार और ट्रॉफी से नवाजा गया। हालांकि, ट्रॉफी लेने के लिए फिल्म के निर्माता निर्देशक मौजूद नहीं थे।
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इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया
- फोटो : सोशल मीडिया
रविवार को इसका समापन हो गया। नौ दिनों तक चले इस फिल्म फेस्टिवल में दुनिया भर के तमाम दिग्गज निर्देशकों की फिल्मों को दिखाया गया। इस बार इस फेस्टिवल के दौरान उन कलाकारों को श्रद्धांजलि भी दी गई जिन्होंने वर्ष 2020 में इस दुनिया को अलविदा कह दिया। इन कलाकारों में मुख्य रूप से इरफान खान, सुशांत सिंह राजपूत, ऋषि कपूर, सौमित्र चैटर्जी, चैडविक बोसेमन जैसे कलाकार शामिल हैं।
इन सभी दिवंगत कलाकारों की 'पान सिंह तोमर', 'केदारनाथ', 'बॉबी', 'चारुलता', '42' जैसी फिल्मों को इफ्फी समारोह में दिखाया गया। इस महोत्सव की अलग-अलग श्रेणियों में लगभग 224 फिल्मों का प्रदर्शन हुआ। पैनारोमा सेक्शन की पहली फिल्म 'सांड की आंख' रही जिसमें तापसी पन्नू और भूमि पेडनेकर में मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं। जापान की ऐतिहासिक ड्रामा फिल्म 'वाइफ ऑफ ए स्पाई' इस नौ दिन तक चले इफ्फी समारोह की अंतिम फिल्म रही जिसका निर्देशन कियोशी कुरोसावा ने किया है।