रामायण में राम का किरदार निभाने वाले अभिनेता अरुण गोविल का आज जन्मदिन है। उनका बचपन उत्तर प्रदेश के मेरठ में गुजरा। मेरठ यूनिवर्सिटी से ही उन्होंने पढ़ाई की और 17 साल की उम्र में बिजनेस के सिलसिले में मुंबई आ गए लेकिन अचानक उनके मन में अभिनय का जोश आ गया और वे अभिनेता बन गए। अरुण गोविल ने बीबीसी को दिए इंटरव्यू में अपने करियर पर बात की थी। चलिए उनके जन्मदिन पर बताते हैं उनसे जुड़ी कुछ रोचक बातें।
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अरुण गोविल और रामायण
- फोटो : सोशल मीडिया
अरुण गोविल ने बीबीसी को बताया, ''शुरुआती दौर में मैंने कई फिल्मों में साइड हीरो का किरदार निभाया और फिर राजश्री प्रोडक्शन हाउस ने मुझे फिल्म 'सावन को आने दो' में ब्रेक दिया।'' ये फिल्म बेहद कामयाब रही और इसके बाद से अरुण गोविल का फिल्मी सफर शुरू हो गया लेकिन लोकप्रियता उन्हें धारावाहिक 'विक्रम और बेताल' में महाराज विक्रमादित्य के किरदार से मिली। ये धारावाहिक दूरदर्शन पर प्रसारित किया जाता था।
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अरुण गोविल
- फोटो : Twitter
अरुण गोविल कहते हैं, "इसी धारावाहिक के चलते मुझे मौका मिला रामानंद सागर से मिलने का क्योंकि ये सीरियल उनके बेटे प्रेम सागर बना रहे थे। मैं उनसे मिलने गया और मैंने कई सारे स्क्रीन टेस्ट दिए। रामानंद सागर जी ने मुझसे कहा कि तुम्हें हम लक्ष्मण या भरत के किरदार के लिए चुन लेंगे। मेरे मन में राम का ही किरदार था लेकिन मैंने उनसे कहा कोई नहीं, आप जैसा उचित समझें।बाद में उनकी सिलेक्शन टीम और रामानंद जी ने कहा की हमें तुम्हारे जैसा राम नहीं मिलेगा।"
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अरुण गोविल
- फोटो : Social Media
राम का किरदार करने के बाद अरुण गोविल की जिंदगी बदल गई। लोग सार्वजनिक जगहों पर अरुण को देखते तो उनके पांव छूने लगते और आशीर्वाद मांगते। लोग उनको उनके किरदार से अलग नहीं देख पाते थे। अपनी पुरानी यादों को याद करते हुए अरुण कहते हैं, "मुझे याद है एक दिन मैं सेट पर टी-शर्ट पहन कर बैठा हुआ था। एक महिला आई और सेट पर काम करने वाले लोगों से पूछने लगी श्री राम कहां है। वो कह रही कि उसे मुझसे मिलना है" उसके गोद में एक बच्चा था। सेट पर काम करने वाले लोगों ने उसे मेरे पास भेज दिया।
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रामायण
- फोटो : सागर आर्ट्स
"पहले तो वो मुझे पहचान नहीं पाई फिर उसने मुझे कुछ देर तक देखा और रोते हुए अपना बच्चा मेरे कदमों में रख दिया। मैं घबरा गया। मैंने कहा 'आप ये क्या कर रही हैं। छोड़िये मेरे पैरों को।' उसने रोते हुए कहा 'मेरा बेटा बीमार है। ये मर जाएगा आप इसे बचा लीजिये।' मैंने उन्हें हाथ जोड़कर समझाया कि 'ये मेरे हाथ में नहीं है, मैं कुछ नहीं कर सकता। आप इसे अस्पताल ले जाइये।' मैंने उन महिला को कुछ पैसे दिए। मैंने भगवान से उनके बेटे को ठीक करने की प्रार्थना की और फिर समझाया और अस्पताल जाने को कहा।"