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2018 में आने वाली हैं ये 18 फिल्में, अभी से देख लीजिए इन सबकी एक झलक
रवि बुले, एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Updated Sun, 07 Jan 2018 02:25 PM IST
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सितारे विस्थापित नहीं हो रहे, परंतु बॉलीवुड में कहानी केंद्र में आ रही है। भव्य बजट और बड़े सितारों वाली फिल्मों के बीच कम बजट, संजीदा विषय तथा मंजे अभिनेताओं वाली ‘हाई कॉन्सेप्ट लो बजट’ फिल्में चौंका रही हैं। सितारे भी इनकी तरफ झुक रहे हैं। एक नजर 2018 की ऐसी ही 18 फिल्मों पर, जो बॉलीवुड को नई राहें ढूंढने में मदद कर सकती हैं।
1.पैडमैन
तमिलनाडु निवासी पद्मश्री अरुणाचलम मुरुगनाथम के जीवन से प्रेरित फिल्म 'पैडमैन' वर्जनाओं को चुनौती देगी।
अमेरिका के पास सुपरमैन है, बैटमैन है, स्पाइडर मैन है, लेकिन इंडिया के पास पैडमैन है। तमिलनाडु निवासी पद्मश्री अरुणाचलम मुरुगनाथम के जीवन से प्रेरित फिल्म 'पैडमैन' वर्जनाओं को चुनौती देगी। यह महिलाओं के मासिक धर्म पर पिछड़ी सोच पर प्रहार है। निर्देशक आर. बाल्की की फिल्म में अक्षय कुमार किफायती मूल्य में सैनेटरी पैड्स बनाने की मशीन ईजाद करते हुए इनकी अहमियत पर जागरूकता फैलाएंगे। सैनेटरी पैड्स पर 12 फीसदी जीएसटी है। दिल्ली हाईकोर्ट सरकार से पूछ चुकी है कि बिंदी, काजल, सिंदूर टैक्स फ्री हैं, तो सैनेटरी पैड्स पर टैक्स क्यों?
2. गालिब
'गालिब' विपरीत परिस्थितियों में लक्ष्य हासिल करने वाले लड़के की कहानी है। गालिब फांसी पर चढ़ाए गए आतंकी अफजल गुरु का बेटा है। कश्मीर के दसवीं बोर्ड की परीक्षा में उसके 95 फीसदी नंबर आए। उसकी प्रेरणा है, मां। गालिब मां-बेटे के स्नेह और ताकत को दिखाती है। निर्देशक मनोज गिरी के अनुसार फिल्म देशप्रेम, शिक्षा और मानवता की जीत को दर्ज करती है। फिल्म यूपी और जम्मू-कश्मीर में शूट हुई। गालिब की मां के रोल में टीवी पर सीता के रूप में चर्चित हुई दीपिका चिखलिया हैं। गालिब गुरु के किरदार में एक्टर निखिल पिताले हैं।
3.यूनियन लीडर
मजदूर संगठन सिनेमा से लंबे समय से गायब हैं। कनाडा में रहने वाले निर्देशक संजय पटेल की फिल्म में इनकी वापसी दिखेगी। फैक्ट्री वर्कर जय की जिंदगी परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है। फैक्ट्री में बनने वाले उत्पादों में इस्तेमाल हुए रसायन लोगों के लिए घातक हैं। मजदूरों की दुर्दशा दिखाती फिल्म में राहुल भट्ट और तिलोतमा शोम लीड रोल में हैं।
तमिलनाडु निवासी पद्मश्री अरुणाचलम मुरुगनाथम के जीवन से प्रेरित फिल्म 'पैडमैन' वर्जनाओं को चुनौती देगी।
अमेरिका के पास सुपरमैन है, बैटमैन है, स्पाइडर मैन है, लेकिन इंडिया के पास पैडमैन है। तमिलनाडु निवासी पद्मश्री अरुणाचलम मुरुगनाथम के जीवन से प्रेरित फिल्म 'पैडमैन' वर्जनाओं को चुनौती देगी। यह महिलाओं के मासिक धर्म पर पिछड़ी सोच पर प्रहार है। निर्देशक आर. बाल्की की फिल्म में अक्षय कुमार किफायती मूल्य में सैनेटरी पैड्स बनाने की मशीन ईजाद करते हुए इनकी अहमियत पर जागरूकता फैलाएंगे। सैनेटरी पैड्स पर 12 फीसदी जीएसटी है। दिल्ली हाईकोर्ट सरकार से पूछ चुकी है कि बिंदी, काजल, सिंदूर टैक्स फ्री हैं, तो सैनेटरी पैड्स पर टैक्स क्यों?
2. गालिब
'गालिब' विपरीत परिस्थितियों में लक्ष्य हासिल करने वाले लड़के की कहानी है। गालिब फांसी पर चढ़ाए गए आतंकी अफजल गुरु का बेटा है। कश्मीर के दसवीं बोर्ड की परीक्षा में उसके 95 फीसदी नंबर आए। उसकी प्रेरणा है, मां। गालिब मां-बेटे के स्नेह और ताकत को दिखाती है। निर्देशक मनोज गिरी के अनुसार फिल्म देशप्रेम, शिक्षा और मानवता की जीत को दर्ज करती है। फिल्म यूपी और जम्मू-कश्मीर में शूट हुई। गालिब की मां के रोल में टीवी पर सीता के रूप में चर्चित हुई दीपिका चिखलिया हैं। गालिब गुरु के किरदार में एक्टर निखिल पिताले हैं।
3.यूनियन लीडर
मजदूर संगठन सिनेमा से लंबे समय से गायब हैं। कनाडा में रहने वाले निर्देशक संजय पटेल की फिल्म में इनकी वापसी दिखेगी। फैक्ट्री वर्कर जय की जिंदगी परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है। फैक्ट्री में बनने वाले उत्पादों में इस्तेमाल हुए रसायन लोगों के लिए घातक हैं। मजदूरों की दुर्दशा दिखाती फिल्म में राहुल भट्ट और तिलोतमा शोम लीड रोल में हैं।
4. मंटो
अखंड भारत के चर्चित लेखकों में शुमार सआदत हसन मंटो की बायोपिक नंदिता दास ने डायरेक्ट की है। नवाजुद्दीन सिद्दीकी लीड रोल में हैं। फिल्म आजादी के पहले के दौर में मंटो का संघर्ष बयान करती है, जब उन पर अश्लील लेखन के आरोप लगे और अदालत में मुकदमे दायर हुए। नंदिता का कहना है कि मंटो आज भी प्रासंगिक है और फिल्म के बहाने समाज को आईना दिखाने की कोशिश है। नंदिता ने 2002 के गुजरात दंगों पर 'फिराक' बनाई थी, जिसमें उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा। क्या नंदिता के 'मंटो' की बिंदास बातें सेंसर को पसंद आएंगी?
5. निम्मो
निर्माता के रूप में आनंद एल.राय अलग तरह की कहानियां पर्दे पर लाने की कोशिश में हैं। निल बटे सन्नाटा, हैपी भाग जाएगी और शुभ मंगल सावधान के बाद वह 'निम्मो' ला रहे हैं। निर्देशक हैं राहुल सांकल्य। फिल्म मध्य प्रदेश के एक गांव की कहानी है, जहां आठ साल के नादान लड़के (करण दवे) को 19 साल की लड़की (अंजली पाटिल) से प्यार है। माता-पिता लड़की की शादी कहीं और तय करते हैं, तो बच्चा नाराज हो जाता है। लड़की शादी तो कर लेती है, लेकिन बच्चे को एक अनूठी सीख दे जाती है। 'रांझणा' वाले धनुष इसमें मेहमान कलाकार होंगे।
6. मेरे प्यारे प्राइम मिनिस्टर
'रंग दे बसंती' के निर्देशक ओम प्रकाश मेहरा की अगली फिल्म प्रधानमंत्री को संबोधित है। बात एक बच्चे के माध्यम से हो रही है। 'मेरे प्यारे प्राइम मिनिस्टर' एक बच्चे की कहानी है, जो मुंबई की झुग्गी-झोपड़ी में सिंगल मदर के साथ रहता है। यहां टॉयलेट नहीं है। बच्चा चाहता है कि झुग्गी में टॉयलेट बने, जिससे मां को खुले में शौच न जाना पड़े। यह बात प्रधानमंत्री तक पहुंचती है। अंजली पाटिल सिंगल मदर की भूमिका में हैं।
अखंड भारत के चर्चित लेखकों में शुमार सआदत हसन मंटो की बायोपिक नंदिता दास ने डायरेक्ट की है। नवाजुद्दीन सिद्दीकी लीड रोल में हैं। फिल्म आजादी के पहले के दौर में मंटो का संघर्ष बयान करती है, जब उन पर अश्लील लेखन के आरोप लगे और अदालत में मुकदमे दायर हुए। नंदिता का कहना है कि मंटो आज भी प्रासंगिक है और फिल्म के बहाने समाज को आईना दिखाने की कोशिश है। नंदिता ने 2002 के गुजरात दंगों पर 'फिराक' बनाई थी, जिसमें उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा। क्या नंदिता के 'मंटो' की बिंदास बातें सेंसर को पसंद आएंगी?
5. निम्मो
निर्माता के रूप में आनंद एल.राय अलग तरह की कहानियां पर्दे पर लाने की कोशिश में हैं। निल बटे सन्नाटा, हैपी भाग जाएगी और शुभ मंगल सावधान के बाद वह 'निम्मो' ला रहे हैं। निर्देशक हैं राहुल सांकल्य। फिल्म मध्य प्रदेश के एक गांव की कहानी है, जहां आठ साल के नादान लड़के (करण दवे) को 19 साल की लड़की (अंजली पाटिल) से प्यार है। माता-पिता लड़की की शादी कहीं और तय करते हैं, तो बच्चा नाराज हो जाता है। लड़की शादी तो कर लेती है, लेकिन बच्चे को एक अनूठी सीख दे जाती है। 'रांझणा' वाले धनुष इसमें मेहमान कलाकार होंगे।
6. मेरे प्यारे प्राइम मिनिस्टर
'रंग दे बसंती' के निर्देशक ओम प्रकाश मेहरा की अगली फिल्म प्रधानमंत्री को संबोधित है। बात एक बच्चे के माध्यम से हो रही है। 'मेरे प्यारे प्राइम मिनिस्टर' एक बच्चे की कहानी है, जो मुंबई की झुग्गी-झोपड़ी में सिंगल मदर के साथ रहता है। यहां टॉयलेट नहीं है। बच्चा चाहता है कि झुग्गी में टॉयलेट बने, जिससे मां को खुले में शौच न जाना पड़े। यह बात प्रधानमंत्री तक पहुंचती है। अंजली पाटिल सिंगल मदर की भूमिका में हैं।
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7. नक्काश
युवा निर्देशक जैगम इमाम दोजखः इन सर्च ऑफ हेवन (2015) और अलिफ (2017) के बाद फिर मुस्लिम समाज को लेकर बनाई फिल्म 'नक्काश' के साथ तैयार हैं। फिल्म बनारस की गलियों और घाटों पर शूट हुई। इसमें जैगम ने हिंदू-मुस्लिम विमर्श को नए ढंग से उभारा है। यहां कबीर परंपरा के हिंदू-मुस्लिम सौहार्द्र में दोनों तरफ से होने वाली राजनीति का मिश्रण दिखेगा।
8. पीहू
'मिस टनकपुर हाजिर हों' में पत्रकार से फिल्मकार बने विनोद कापड़ी की फिल्म 'पीहू' प्रयोगधर्मी सिनेमा है। पूरी फिल्म में आपको सिर्फ दो साल की बच्ची दिखेगी, जिसके पीछे-पीछे कैमरा घूमता है। तीन कैमरों से उसके साथ खेलते-बात करते हुए फिल्म शूट हुई। 'पीहू' में खास क्या है? फिल्म थ्रिलर है! फिल्म नई पीढ़ी के दंपतियों के लिए सबक है।
कापड़ी कहते हैं, ‘पीहू मेरी जिंदगी की कहानी है। रिश्तों में खराब संबंधों के दौर से मैं गुजरा हूं और अंततः इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि पूरे प्रकरण में बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं।’
9. अंग्रेजी में कहते हैं
बनारस में रहने वाले 54 साल के यशवंत बत्रा (संजय मिश्रा) को जीवन में पत्नी का महत्व तब समझ आता है, जब वह उन्हें छोड़ कर चली जाती है। बेमेल विवाह, पारिवारिक-सामाजिक दबाव में विवाह हुआ था और बत्रा ने इसकी कद्र नहीं की। निर्माता मानव मल्होत्रा के अनुसार, बड़े होते बच्चे, रोजमर्रा का संघर्ष शादीशुदा जीवन में चुनौतियां पैदा करते हैं। उसके परिणाम आगे दिखते हैं।
युवा निर्देशक जैगम इमाम दोजखः इन सर्च ऑफ हेवन (2015) और अलिफ (2017) के बाद फिर मुस्लिम समाज को लेकर बनाई फिल्म 'नक्काश' के साथ तैयार हैं। फिल्म बनारस की गलियों और घाटों पर शूट हुई। इसमें जैगम ने हिंदू-मुस्लिम विमर्श को नए ढंग से उभारा है। यहां कबीर परंपरा के हिंदू-मुस्लिम सौहार्द्र में दोनों तरफ से होने वाली राजनीति का मिश्रण दिखेगा।
8. पीहू
'मिस टनकपुर हाजिर हों' में पत्रकार से फिल्मकार बने विनोद कापड़ी की फिल्म 'पीहू' प्रयोगधर्मी सिनेमा है। पूरी फिल्म में आपको सिर्फ दो साल की बच्ची दिखेगी, जिसके पीछे-पीछे कैमरा घूमता है। तीन कैमरों से उसके साथ खेलते-बात करते हुए फिल्म शूट हुई। 'पीहू' में खास क्या है? फिल्म थ्रिलर है! फिल्म नई पीढ़ी के दंपतियों के लिए सबक है।
कापड़ी कहते हैं, ‘पीहू मेरी जिंदगी की कहानी है। रिश्तों में खराब संबंधों के दौर से मैं गुजरा हूं और अंततः इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि पूरे प्रकरण में बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं।’
9. अंग्रेजी में कहते हैं
बनारस में रहने वाले 54 साल के यशवंत बत्रा (संजय मिश्रा) को जीवन में पत्नी का महत्व तब समझ आता है, जब वह उन्हें छोड़ कर चली जाती है। बेमेल विवाह, पारिवारिक-सामाजिक दबाव में विवाह हुआ था और बत्रा ने इसकी कद्र नहीं की। निर्माता मानव मल्होत्रा के अनुसार, बड़े होते बच्चे, रोजमर्रा का संघर्ष शादीशुदा जीवन में चुनौतियां पैदा करते हैं। उसके परिणाम आगे दिखते हैं।
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10. लव एंड शुक्ला
कई अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में सराही गई 'लव एंड शुक्ला' मुंबई के दड़बों जैसे कमरों में एक ऑटो ड्राइवर के नए दांपत्य जीवन की कहानी है। मूल रूप से यूपी के रहने वाले, इस जोड़े और शुक्ला के माता-पिता के बीच कमरे में अटैचियों की दीवार बनती है, लेकिन समस्याएं कई हैं। हैदराबाद निवासी निर्देशक सिद्धार्थ जाटला ने फिल्म को अपने दोस्तों और एफटीआई के सहपाठियों के साथ मिलकर बनाया। सहर्ष कुमार शुक्ला और टीना राजावत मुख्य भूमिकाओं में हैं।
11. खिडो खुंडी
खेल के मैदान की हस्तियां सिनेमा को लुभा रही हैं, लेकिन निर्देशक रोहित जुगराज की यह फिल्म किसी एक शख्स की नहीं, बल्कि पूरे गांव की है। हिंदी-पंजाबी में बन रही फिल्म हॉकी पर है। यह हमें पंजाब के ऐसे गांव में ले जाएगी, जहां से 14 ओलंपियन हॉकी मेडलिस्ट निकले हैं। जुगराज कहते हैं, ‘फिल्म के बाद पूरा देश गांव पर गर्व करेगा।’ गांव का नाम है, संसारपुर। खिडो का मतलब है फटे-पुराने कपड़ों से बनी गेंद और खुंडी यानी मुड़ी हुई लकड़ी।
12. गुल मकई
यह फिल्म नोबेल पुरस्कार प्राप्त पाकिस्तानी लड़की मलाला यूसुफजई की बायोपिक है। 'गुल मकई' को मलाला के बहाने भारत में 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' अभियान से जोड़ा गया है। फिल्म का पाकिस्तान में भी इंतजार है। मलाला के स्कूल जाने और पढ़ने की ही जिद थी कि तालिबानों ने उसे गोलियां मारी। निर्देशक अमजद खान ने टीवी अभिनेत्री रीम शेख को इसलिए चुना कि उनका चेहरा-कद-काठी मलाला से काफी मिलता है। दिव्या दत्ता मलाला की मां बनी हैं।
कई अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में सराही गई 'लव एंड शुक्ला' मुंबई के दड़बों जैसे कमरों में एक ऑटो ड्राइवर के नए दांपत्य जीवन की कहानी है। मूल रूप से यूपी के रहने वाले, इस जोड़े और शुक्ला के माता-पिता के बीच कमरे में अटैचियों की दीवार बनती है, लेकिन समस्याएं कई हैं। हैदराबाद निवासी निर्देशक सिद्धार्थ जाटला ने फिल्म को अपने दोस्तों और एफटीआई के सहपाठियों के साथ मिलकर बनाया। सहर्ष कुमार शुक्ला और टीना राजावत मुख्य भूमिकाओं में हैं।
11. खिडो खुंडी
खेल के मैदान की हस्तियां सिनेमा को लुभा रही हैं, लेकिन निर्देशक रोहित जुगराज की यह फिल्म किसी एक शख्स की नहीं, बल्कि पूरे गांव की है। हिंदी-पंजाबी में बन रही फिल्म हॉकी पर है। यह हमें पंजाब के ऐसे गांव में ले जाएगी, जहां से 14 ओलंपियन हॉकी मेडलिस्ट निकले हैं। जुगराज कहते हैं, ‘फिल्म के बाद पूरा देश गांव पर गर्व करेगा।’ गांव का नाम है, संसारपुर। खिडो का मतलब है फटे-पुराने कपड़ों से बनी गेंद और खुंडी यानी मुड़ी हुई लकड़ी।
12. गुल मकई
यह फिल्म नोबेल पुरस्कार प्राप्त पाकिस्तानी लड़की मलाला यूसुफजई की बायोपिक है। 'गुल मकई' को मलाला के बहाने भारत में 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' अभियान से जोड़ा गया है। फिल्म का पाकिस्तान में भी इंतजार है। मलाला के स्कूल जाने और पढ़ने की ही जिद थी कि तालिबानों ने उसे गोलियां मारी। निर्देशक अमजद खान ने टीवी अभिनेत्री रीम शेख को इसलिए चुना कि उनका चेहरा-कद-काठी मलाला से काफी मिलता है। दिव्या दत्ता मलाला की मां बनी हैं।