देव आनंद को अगर अपने समय का सुपरस्टार कहा जाए तो इसमें कोई दो राय नहीं होगी। वह एक कलाकार नहीं बल्कि एक स्टार थे। वो स्टार जिनकी दुनिया दीवानी थी। लड़कियां जिसकी एक झलक पाने के लिए बेताब रहती थीं। बेशक देव आनंद का सुपरस्टारडम ज्यादा लंबा नहीं चला लेकिन जिस कदर उस छोटे से दौर में लोगों ने उन्हें चाहा, उन्हें लेकर जो दीवानगी थी, वैसी आज कल के किसी अभिनेता को नसीब नहीं हो पाएगी। हालांकि यहां कोई रैंकिंग नहीं दी जा रही है। तीन दिसंबर को देव आनंद की पुण्यतिथि है। इस मौके पर आइए एक नजर डालते हैं उनके स्टारडम पर...
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देव आनंद
- फोटो : social media
देव आनंद एक अभिनेता थे, निर्देशक थे, निर्माता थे, कहानी गढ़ते थे, संगीत की समझ रखते थे और शायद सबसे खास बात ये थी कि अपने समय से आगे सोचने की क्षमता उनके अंदर थी। बतौर हीरो देव आनंद की पहली फिल्म 1946 में आई 'हम एक हैं' थी। देव आनंद की एक्टिंग के अंदाज ने उन्हें हमेशा दूसरे एक्टर्स की भीड़ से अलग रखा। तारीफ पाने वाले देव आनंद को आलोचना भी कम नहीं मिली। कुछ लोगों ने सवाल भी उठाए। ये तक कहा कि अब देव आनंद को काम छोड़ देना चाहिए।
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देव आनंद
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लेकिन उन्होंने वो दौर भी देखा जब गर्दन झुकाने का वो गजब अंदाज, काली पैंट शर्ट का उनका लिबास लड़कियों को बेहोश करता था। कहा जाता है उन्हें देखकर उन दिनों सफेद शर्ट पर काला कोट पहनने का स्टाइल बहुत ट्रेंड हुआ था, लेकिन इसके बाद कुछ ऐसा हुआ कि सार्वजनिक जगहों पर काला कोट पहनने पर ही बैन लगा दिया गया था। कितनी ही लड़कियों ने उनके लिए अपनी जान गवां दीं। कहा जाता है देव साहब की हिट फिल्म 'काला पानी' में उन्हें काले रंग का कोट पहनने से रोका गया। क्योंकि काले रंग के कोट में वे इतने हैंडसम लगते थे कि ये डर था कि कहीं लड़कियां उन्हें देखकर छत से न कूद जायें? उन दिनों ऐसी खबरें खूब लिखी जाती थी। जाहिर है ऐसा कुछ होता नहीं रहा होगा लेकिन देव साहब ने कभी अपने दौर में मीडिया में जाकर इस बात से इनकार भी नहीं किया।
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देव आनंद
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सिनेमा के इस सुपरस्टार की इतनी फैन फॉलोइंग थी कि थियेटर फुल हो जाते थे। लोग धूप में घंटों खड़े होकर टिकट लेते थे। देव साहब की फिल्म जॉनी मेरा नाम जब रिलीज हुई तो फर्स्ट डे फर्स्ट शो के लिए भीड़ लग गई। अनु कपूर बताते हैं उस वक्त जमशेदपुर के एक सिनेमाघर के बाहर फिल्म के टिकट के लिए गोलियां चल गई थीं। जिसमें दो छात्रों की मौत तक हो गई। इस घटना के बाद एक सप्ताह के लिए नटराज टॉकिज बंद कर दिया गया। इस कदर लोगों के दिलों दिमाग पर हावी थे देव आनंद।
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dev anand
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देव आनंद ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत 1946 में आई फिल्म 'हम एक हैं' से की थी, 'आगे बढो', 'मोहन', 'हम भी इंसान हैं' जैसी कुछ फिल्मों के बाद, उनके सफर का पहला मुख्य मील का पत्थर साबित हुई फिल्मिस्तान की 'जिद्दी'।