रूना लैला एक ऐसी सिंगर हैं जो किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। वह हैं तो एक बांग्लादेशी लेकिन हिंदी सिनेमा के लिए भी रूना ने कई गाने गाए हैं। रूना लैला का कनेक्शन पाकिस्तान से भी है। वह एक ऐसी कलाकार हैं, जिनको भारत, बांग्लादेश और पाकिस्तान तीनों देश से खूब प्यार मिला है। रूना की आवाज का जादू चटगांव से कराची तक चला है। आज वह अपना 70वां जन्मदिन मना रही हैं। तो चलिए इस खास मौके पर उनसे जुड़ी कुछ बातें जानते हैं-
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रूना लैला
- फोटो : सोशल मीडिया
रूना लैला का जन्म 17 नवंबर 1952 को पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) के सिलहट में हुआ था। उनके पिता राजशाही शहर के थे। जब वह छोटी बच्ची थीं तो एक संगीत के उस्ताद घर आकर उनकी बड़ी बहन दीना लैला को संगीत सिखाया करते थे। रूना छोटी थीं, लेकिन देख-देखकर सहजता से ही उन्होंने संगीत सीख लिया था। रूना लैला को डांस बेहद पसंद था और उन्होंने कत्थक, भरतनाट्यम और कथाकली की भी तालीम हासिल की। रूना की पैदाइश भले ही पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) में हुई हो, लेकिन उनकी पढ़ाई-लिखाई पाकिस्तान से हुई है।
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रूना लैला
- फोटो : सोशल मीडिया
रूना लैला ने भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश की फिल्मी दुनिया में कई गाने गाए हैं। लेकिन उनको दमा दम मस्त कलंदर के जरिए खूब पहचान मिली। रूना ने सिर्फ 12 साल की उम्र में अपना पहला गाना गाया था। उन्होंने पाकिस्तानी फिल्म 'जुगनू' के लिए अपना पहला गाना गाया। उनका सबसे मश्हूर गीत 'उनकी नजरों से मोहब्बत का जो पैगाम मिला...' था। इस गीत के ने तो जैसे उनके लिए कामयाबी की नई इबारत लिख दी।
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रूना लैला
- फोटो : सोशल मीडिया
जिस दौर में रूना ने फिल्मी दुनिया में कदम रखा था उस दौरान लता मंगेशकर और आशा भोंसले जैसी दिग्गज गायिका फिल्मी दुनिया में राज करती थीं। उस दौरान रूना ने मेरा बाबू छैन छबीला और दमा दम मस्त कलंदर गाकर सभी को हैरान कर दिया था। बता दें कि रूना लैला लता मंगेशकर की बहुत बड़ी फैन हैं। 1974 में रूना लैला को इंडियन काउंसिल फॉर कल्चरल रिलेशंस से भारत आने का न्योता मिला था इस दौरान काउंसिल ने उनसे पूछा कि वह अपने भारत दौरे के दौरान किससे मिलना चाहेंगी तो उन्होंने लता मंगेशकर का नाम लिया था।