टीवी धारावाहिकों और फिल्मों की शूटिंग और पोस्ट प्रोडक्शन का काम शुरू करने की इजाजत मिलने के बाद अब सिनेमाघरों के मालिकों को भी जल्दी राहत मिलने वाली है। सूत्रों से जानकारी मिली है कि केंद्र सरकार के कैबिनेट मंत्री के साथ कुछ चुने हुए सिनेमाघरों के मालिकों के साथ हुई ऑनलाइन बातचीत में जुलाई से सिनेमाघर फिर से खोलने पर सहमति बन गई है। सिनेमाघरों में साफ सफाई का काम भी बुधवार से शुरू कर दिया गया है। सिनेमाघर मालिकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि सिनेमा घर के अंदर सभी जगहों पर सोशल डिस्टेंसिंग और स्वास्थ्य संबंधी सभी दिशा निर्देशों का पालन होगा।
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सिनेमा हॉल
- फोटो : सांकेतिक तस्वीर
कोरोना वायरस की वजह से देश में जब से लॉकडाउन हुआ है तब से लगभग सभी कारोबारी खूब नुकसान झेल रहे हैं। इनमें सिनेमाघरों के मालिकों की भी गिनती है। 1 जून से सरकार ने कुछ चीजों को खोलने की इजाजत तो दी है लेकिन सिनेमाघर अभी भी बंद है। इस मुलाकात से एक्जीबिटर्स को यह आशा जगी है कि जल्द ही उनका भी भला हो जाएगा। इस ऑनलाइन मुलाकात में सिनेमाघरों के मालिकों की सभी परेशानियां धैर्य पूर्वक सुनी गईं और उन्हें अच्छे से समझा भी गया। सिनेमाघर मालिकों को ये आश्वासन मिला है कि वह गृह मंत्रालय से बात करके जुलाई से सिनेमाघरों को खुलवाने की गुजारिश करेंगे। उससे पहले सभी सिनेमाघरों के मालिकों को यह सुनिश्चित करवाना होगा कि उनके यहां सोशल डिस्टेंसिंग और स्वास्थ्य सुरक्षा संबंधी सभी व्यवस्थाएं पुख्ता होंगी।
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सिनेमाघर
- फोटो : AmarUjala
इसी बीच दुनिया की सबसे बड़ी एग्जीबिशन ट्रेड आर्गेनाईजेशन नेशनल एसोसिएशन ऑफ थिएटर ओनर्स ने ये उम्मीद जताई है कि पूरी दुनिया के लगभग 90 फीसदी सिनेमाघर जुलाई से खुल जाएंगे। यह संस्था अमेरिका के पूरे 50 राज्यों में लगभग 35 हजार से ज्यादा फिल्मी स्क्रीन्स का नेतृत्व करती है। इस संस्था के साथ दुनियाभर में लगभग 98 देशों के सिनेमाघर जुड़े हुए हैं। संयुक्त राज्य अमीरात, डेनमार्क, स्विजरलैंड इस्टोनिया और न्यूजीलैंड जैसे कुछ देश हैं जहां सिनेमाघर खोल दिए गए हैं। इस समय सबकी निगाहें भारत पर टिकी हुई हैं।
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सिनेमाघर के बाहर सन्नाटा
- फोटो : अमर उजाला
इस बीच कोरोना वायरस को लेकर भारत की स्थिति बद से बदतर हो चली है। ऐसे में कुछ जगहों पर लॉकडाउन में ढील जरूर दी गई है लेकिन ऐसी जगहों को अभी बंद रखा गया है जहां पर ज्यादा तादाद में लोग जमा हो सकते हैं। उनमें सिनेमाघर भी आते हैं। यहां सवाल यह भी उठता है कि अगर भारत के मेट्रो शहरों में सिनेमाघर खोल दिए जाएं तो क्या इनमें दर्शक फिल्म देखने आएंगे? इसी डर से हो सकता है कि कुछ महीने तो इन सिनेमाघरों में नई फिल्में रिलीज भी न हों। फिर तो सिनेमाघर पुरानी फिल्में ही दिखा पाएंगे।
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Yash Raj Films, Dharma Productions
- फोटो : amar ujala
जानकारी के मुताबिक यशराज फिल्म्स, रिलायंस एंटरटेनमेंट और वॉर्नर ब्रदर्स जैसे कुछ स्टूडियो एक साथ आए हैं और वह अपनी पुरानी फिल्में सिनेमाघरों को दे रहे हैं। इसके बदले में उन्हें कोई पैसा भी नहीं चाहिए। सिनेमाघरों को नाम मात्र के लिए कोरियर का दाम चुकाना होगा। अगर सिनेमाघर चाहें तो ये फिल्में लोगों को फ्री में भी दिखा सकते हैं। दरअसल, ये स्टूडियोज चाहते हैं कि इस तरह से लोगों को सिनेमाघरों में वापस लाने की आदत डाली जाए ताकि जब वह अपनी नई फिल्में रिलीज करें तो उनसे कमाई हो सके।