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दिल से: वो जो रुकी-सी राह बाकी है, वो जो रुकी-सी चाह बाकी है
मैंने सोच रखा था कि अगर किसी रियलिटी शो में हारता भी हूं, तो अपने सपने के पीछे दौड़ना नहीं छोड़ूंगा। मैंने बस वही किया...आज भी सपनों का पीछा कर रहा हूं...भाग रहा हूं। घर में शुरू से ही संगीत का वातावरण रहा, लेकिन फिर भी मैंने अपनी जगह बनाने के लिए बहुत संघर्ष किया है। मेरी मां एक गायिका थीं और मामा तबला वादक रहे। मेरी नानी भारतीय शास्त्रीय संगीत में रुची रखती थीं।
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arijit singh
इसी वजह से मेरा मन संगीत में रम गया। संगीत की शिक्षा पंडित राजेंद्र प्रसाद हजारी, धीरेंद्र प्रसाद हजारी और वीरेंद्र प्रसाद हजारी जी से ली। संगीत की पूरी शिक्षा लेने के बाद, मुझे मेरे गुरु ने प्रोत्साहित किया, जिसके बाद 2005 में मुझे एक रियलिटी शो में बतौर प्रतिभागी हिस्सा लेने का मौका मिला। इस शो में सराहना तो खूब मिली, लेकिन जीत नहीं पाया।
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इसके बाद मैंने एक और शो में हिस्सा लिया था, वह जीता तो मन मुंबई में बसने का बना लिया। मैंने अपने जीते हुए पैसों से एक स्टूडियो बनवाया और खुद ही गाने लिखने लगा। शुरुआत में टीवी के विज्ञापनों और रेडियो के लिए छोटे-छोटे जिंगल्स गाने लगा। इसी बीच शंकर-एहसान-लॉय, विशाल शेखर, मिथुन, मॉन्टी शर्मा और प्रीतम के लिए कई प्रोजेक्टस पर काम किया।
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वर्ष 2010 में, मैंने प्रीतम सर के साथ तीन फिल्मों 'गोलमाल-3', 'क्रूक' और 'एक्शन रिप्ले' में काम किया। इसी बीच मुझे तेलुगू फिल्म इंडस्ट्री में फिल्म 'केडी' में 'नीवे ना नीवे' गाने का मौका मिला और लोगों से उसे खूब सराहा। बॉलीवुड में डेब्यू किया फिल्म 'मर्डर-2' के 'फिर मोहब्बत' गाने से। हालांकि यह गाना रिकॉर्ड तो वर्ष 2009 में ही हो गया था, लेकिन किन्हीं कारणों से तब रिलीज नहीं हुआ।
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मैं मानता हूं कि कुछ चीजें आपके अच्छे के लिए होती हैं। मुझे सफलता मिली फिल्म 'आशिकी-2' के गानों से। उसके बाद कई अच्छे मौके मुझे मिलते रहे। मैं यही कोशिश करता हूं कि जो भी गाऊं, उसमें अपनी जान डाल दूं। मैंने अब तक जो भी किया, वह सोच-समझकर नहीं किया। बस करता चला गया और लोगों को मेरी कोशिशें हमेशा पसंद आई, उसके लिए मैं उनका शुक्रगुजार रहूंगा।
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