बी.आर. चोपड़ा की फिल्में और 'महाभारत' आज भी दर्शकों के बीच जीवित हैं। उनकी कहानियां और किरदार पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे। उनकी विरासत आज भी हिंदी सिनेमा में चमक रही है। आज बी.आर. चोपड़ा की जयंती पर जानिए उनसे जुड़े किस्से...
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बेहतरीन निर्माता और निर्देशक
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पत्रकार से फिल्म निर्माता तक का सफर
बी.आर. चोपड़ा ने अपने करियर की शुरुआत एक पत्रकार के रूप में की थी। उन्होंने 1944 में 'सिने हेराल्ड' पत्रिका में काम शुरू किया। लेकिन 1947 में भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद वे मुंबई आ गए और फिल्म निर्माण में कदम रखा। उनकी पहली फिल्म 'करवट' (1949) भले ही न चली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। इसके बाद उन्होंने फिल्म निर्देशक के तौर पर शोले, चांदनी चोक, नया दौर, धूल का फूल जैसी कई फिल्में बनाई। इसके अलावा उन्होंने कई टीवी सीरीज का निर्माण किया, जिसमें महाभारत, बहादुर शाह जफर, कानून और विष्णु पुराण जैसी सीरीज शामिल हैं।
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लाहौर से मुंबई का संघर्ष
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लाहौर से मुंबई का संघर्ष
बी आर चोपड़ा का जन्म 1914 में लुधियाना (पंजाब) में हुआ था। उन्होंने लाहौर की पंजाब यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी में एम.ए. किया। 1947 में विभाजन के समय लाहौर में उनकी फिल्म 'चांदनी चौक' की शूटिंग चल रही थी, लेकिन दंगों के कारण वह अधूरी रह गई। इसके बाद वे मुंबई आए और नए सिरे से शुरुआत की।
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किशोर कुमार की अजीब शर्त
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किशोर कुमार की अजीब शर्त
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एक बार बी.आर. चोपड़ा ने गायक किशोर कुमार को अपनी फिल्म के लिए गाना गाने के लिए बुलाया। किशोर ने मजाक में एक अजीब शर्त रख दी कि वे तभी गाना गाएंगे, जब चोपड़ा उनके साथ सेट पर नाचेंगे। चोपड़ा ने उनकी शर्त मान ली और सेट पर किशोर के साथ थिरकते हुए गाना रिकॉर्ड करवाया।
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धारावाहिक 'महाभारत'
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महाभारत की भव्यता
बी.आर. चोपड़ा की बनाई 'महाभारत' (1988-1990) भारतीय टेलीविजन का ऐतिहासिक धारावाहिक है। इसकी शूटिंग के लिए उन्होंने हर किरदार को जीवंत करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। धारावाहिक की शुरुआत में हरीश भिमानी की आवाज में "मैं समय हूं" डायलॉग इतना लोकप्रिय हुआ कि आज भी लोग इसे याद करते हैं।