कलाकार परदे पर कितने भी किरदार जी ले, लेकिन उसकी आत्मा हमेशा वहीं जुड़ी रहती है जहां से उसने जीवन की असली किलकारी सीखी है यानी उसकी मां। मदर्स डे को हालांकि अभी काफी समय है लेकिन अभिनेता अर्जुन कपूर ने अपनी मां की याद में एक बड़ा काम हाथ में लिया है। वैलेंटाइस डे से पहले प्रॉमिस डे पर उन्होंने सौ ऐसे जोड़ों के साथ हमेशा खड़े रहने का वादा किया, जो कैंसर जैसी असाध्य बीमारी से जूझ रहे हैं।
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अर्जुन कपूर
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
अभिनेता अर्जुन कपूर को नेकी घुट्टी में मिली है। उनकी मां मोना कपूर भी हमेशा अपने आसपास के लोगों की मदद के लिए सबसे आगे रहती थीं। तीन फरवरी को ही कपूर परिवार ने उनकी जयंती मनाई है। अब अपनी मां की देखादेखी अर्जुन कपूर भी एक ऐसे नेक काम का समर्थन करने के लिए आगे आए हैं जो उनके दिल के बेहद करीब है। वैलेंटाइंस डे पर अर्जुन हर साल कुछ न कुछ ऐसा करते रहे हैं जो सामाजिक रूप से उपयोगी हो और दूसरों के लिए प्रेरणा का काम कर सके। इस साल उन्होंने 100 कैंसर कपल्स की मदद करने का बीड़ा उठाया है।
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अर्जुन कपूर
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
कम ही लोग जानते हैं कि अर्जुन कपूर की मां का निधन कैंसर से हुआ था और इसीलिए वह हमेशा इस बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने और इस घातक रोग से प्रभावित लोगों का सहयोग करने में आगे रहते हैं। सौ जोड़ों का साथ देने की अपनी इस पहल के लिए अर्जुन कपूर ने कैंसर पेशेंट्स ऐड एसोसिएशन (सीपीएए) के साथ साझेदारी की है।
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अर्जुन कपूर
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
इस बारे में अर्जुन कपूर कहते हैं, “महामारी ने हम सभी को एक दूसरे की मदद करने और प्यार बांटने का महत्व सिखाया है। जब भी संभव हो, हमें ऐसे काम करते रहने चाहिये। हम सभी फरवरी के महीने में वैलेंटाइन मंथ मना रहे हैं, ताकि अपने प्रियजनों को यह महसूस करवा पाएं वे हमारे लिये कितने खास हैं। तो मैंने इस बार कुछ अलग करने का फैसला किया।”
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अर्जुन कपूर
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
अर्जुन कपूर इस पहल से गहराई से जुड़े हुए हैं और इसीलिए उन्होंने तुरंत इन कपल्स की मदद के लिए आगे आने का फैसला किया। वह कहते हैं, "कैंसर व्यक्ति की इम्युनिटी को गंभीर रूप से प्रभावित करता है जिससे वह कोरोना वायरस को लेकर काफी संवेदनशील हो जाते हैं। पिछला साल इन कपल्स के लिए बहुत दर्दनाक रहा है। वे न केवल एक कठिन लड़ाई लड़ रहे थे, बल्कि कोविड -19 के गंभीर खतरे को देखते हुए वे अपने घरों तक ही सीमित हो गए थे। उनमें से ज्यादातर के पास खाना और जरूरी सामान खरीदने तक के लिए आमदनी का कोई जरिया नहीं बचा था।”