ट्रेजेडी क्वीन मीना कुमारी का निजी जीवन भी ट्रेजेडी की ही तरह था। उनके बारे में कहा जाता है कि उनको शराब और टेलीफोनिक रोमांस की ऐसी लत थी कि वो रातों को जागा करती थीं और दिन में भी नहीं सोती थीं। शराब और तंबाकू ने आखिर में उनकी जान ही ले ली। मीना कुमारी को इस दुनिया से रुखसत हुए 49 साल हो गये हैं, लेकिन उनकी लाइफ के अनसुने किस्से आज भी सिनेमा प्रेेमियों के लिए किसी रोमांच से कम नहीं है। फिल्म पाकीजा ने मीना कुमारी को सदा के लिए भारतीय सिनेमा में अमर कर दिया। कमाल अमरोही के साथ, मीना कुमारी के रोमांस के किस्सों का फिल्मी जगत में अलग ही तरह को रोमांच है। यह किस्से ऐसे हैं, जो सालों से सुनाये जा रहे हैं और आगे भी सालों तक सुनाये जाते रहेंगे।
किस्से बॉलीवुड के: ट्रेजेडी क्वीन मीना कुमारी, जिन्हें लग गई थी शराब- तंबाकू की बुरी लत, आखिरी शब्द थे 'मैं मरना नहीं चाहती'
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दोनों के वैवाहिक जीवन में कुछ वक्त बाद ही दरार आ गई और दोनों एक-दूसरे से अलग हो गये। लेकिन मीना कुमारी उनके साथ काम करने के लिए हमेशा उपलब्ध थी। ये ही वजह है कि उन्होंने फिल्म 'पाकीज़ा' की शूटिंग पूरी करने का फैसला किया। मीना कुमारी अभिनेत्री के तौर पर भारतीय सिनेमा जगत में 32 सालों तक छाई रहीं। वो बेहद भावुक थीं। कमाल से अलग होने के बाद धीरे-धीरे उन्होंने खुद को शराब में डुबो लिया।
'साहब बीवी और गुलाम' ही वो फिल्म थी जिसके बाद मीना कुमारी शराब में डुबती गईं। मीना कुमारी पर किताब लिखने वाले पत्रकार विनोद मेहता ने अपनी किताब 'मीना कुमारी: द क्लासिक बायोग्राफी' में लिखा है कि मीना कुमारी को उनके डॉक्टर सईद टिमर्जा ने नींद की गोलियाें की जगह, रोज एक पेग ब्रांडी लेने की सलाह दी। ये सलाह इसलिए दी गई थी क्योंकि मीना कुमारी रातभर नहीं सोती थीं। उनका एक पैग कब ढेर सारे पैग में तब्दील हो जाते थे उनको भी नहीं पता चलता था। खुद कमाल अमरोही ने एक बार नौकरानी को गिलास को ब्रांडी से आधा भरते देखा, जो डॉक्टर की सलाह से भी ज्यादा था।
दरअसल, मीना कुमारी बिना शराब के रह ही नहीं पाती थी। कुछ दिन बाद उनके बाथरूम की डेटॉल की बॉटल्स में एंटीसेप्टिक की जगह ब्रांडी मिली।
लगातार शराब के सेवन से मीना कुमारी का स्वास्थ्य गिरता जा रहा था। उन्हें एल्कोहल के कारण लिवर सिरॉसिस की बीमारी हो चुकी थी, जिसके इलाज के लिए उन्हें लंदन जाना पड़ा। जहां से लाैटने के बाद मीना कुमारी बेहद कमजोर हो चुकी थीं और इसके बाद भी उन्होंने कई फिल्में कीं।
आखिर में 31 मार्च 1972 में मीना कुमारी ने इस दुनिया को अलविदा कर दिया। अपने जीवन केआखिरी दिनों में मीना कुमारी को 'सेंट एलिज़ाबेथ नर्सिंग होम' में भर्ती कराया गया और वहां कमरा नंबर 26 में उनका इलाज चल रहा था। बताया जाता है कि मीना कुमारी के आखिरी शब्द थे 'आपा, मैं मरना नहीं चाहती।'