बीते 24 साल में हुए झारखंड विधानसभा चुनावों में कोई भी दल बहुमत हासिल करने का कमाल नहीं दिखा पाया है। 2024 में आज मतदान के साथ दूसरे और अंतिम चरण में 38 सीटों पर 1.24 करोड़ मतदाता 528 उम्मीदवारों का भविष्य तय कर देंगे। इसके साथ ही राज्य में चुनाव पूरे हो जाएंगे, मगर बड़ा सवाल यह है कि पिछले चार चुनाव की तरह राज्य के मतदाता किसी दल को बहुमत से वंचित रखने की पुरानी सियासी रवायत बरकरार रखेंगे या इस बार नई पटकथा लिखेंगे। आज तक इस राज्य में किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला है।
81 सदस्यीय विधानसभा वाले राज्य में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भाजपा का है, जब उसने 2014 में 37 सीटें जीती थीं। बुधवार को जिन 38 सीटों पर वोट डाले जाएंगे, उनमें राजग की ओर से भाजपा 32 और आजसू छह सीटों पर चुनाव लड़ रही है। इंडिया गठबंधन की ओर से झामुमो 20, कांग्रेस 12, सीपीएम माले 4 और राजद दो सीटों पर चुनाव लड़ रहा है। बीते चुनाव में भाजपा को 12, झामुमो को 13, कांग्रेस को 8, आजसू को 2 और अन्य को 3 सीटों पर सफलता मिली थी। दूसरे चरण में भाजपा का झामुमो से 17 तो कांग्रेस से 10 सीटों पर मुकाबला है।
पूर्ण जनादेश अब तक रही है टेढ़ी खीर
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झारखंड विधानसभा
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राज्य विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 41 सीट का है। हालांकि बीते चार चुनाव में अब तक कोई भी दल अपने दम पर यह आंकड़ा हासिल नहीं कर पाया है। भाजपा ने 2014 में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के बावजूद बहुमत से चार सीट पीछे रह गई। इस कीर्तिमान को कोई भी दल नहीं तोड़ पाया है। झामुमो ने बीते चुनाव में 30 सीटें, कांग्रेस ने 16 सीटें जीत कर अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था।
जिहाद बनाम आदिवासी अस्मिता की जंग
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झारखंड विधानसभा चुनाव 2024 चरण 2
- फोटो : Amar ujala
इस बार के चुनाव में भाजपा ने जमीन जिहाद, वोट जिहाद और लव जिहाद को सबसे बड़ा मुद्दा बनाया है। इसके जवाब में झामुमो की अगुवाई में इंडिया गठबंधन ने आदिवासी अस्मिता को मुद्दा बनाया है। कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव की तरह इस चुनाव में भी सामाजिक न्याय के मुद्दे को धार देते हुए जाति गणना कराने, आरक्षण की सीमा बढ़ाने की घोषणा की है। चुनाव में भाजपा ने आजसू, लोजपा और जदयू से तो झामुमो ने राजद, कांग्रेस और वाम दलों से गठबंधन किया है।
झारखंड के सियासी चौसर पर किस दल की क्या रणनीति
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हेमंत सोरेन और हिमंत बिस्व सरमा
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भाजपा की रणनीति ओबीसी वोट बैंक को साधने के साथ जेएमएम के आदिवासी वोट बैंक में सेंध लगाने की है। जेएमएम की अगुवाई वाले इंडिया गठबंधन में जेएमएम का चुनाव प्रचार आदिवासी वोट बैंक पर केंद्रित है। कांग्रेस, राजद और वाम दल ओबीसी वोट बैंक को साधने की राजनीति कर रहे हैं। भाजपा के रणनीतिकारों का मानना है कि अगर 2014 के चुनाव की तरह पार्टी ओबीसी वोट बैंक को अपने पक्ष में एकजुट रख पाई और आदिवासी वोट बैंक में सेंध लगा पाई तो उसके लिए सत्ता हासिल करने की राह आसान हो सकती है।
नीतीश का नदारद रहना सुर्खियों में रहा; जेएलकेएम पर भी है नजर
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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार
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चुनाव में राजग और इंडिया ब्लॉक के इतर सबकी निगाहें झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) पर भी है। इस पार्टी के मुखिया जयराम महतो ने 10 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। राज्य में भाजपा और जदयू का गठबंधन है, बावजूद इसके बिहार के सीएम नीतीश कुमार की चुनाव प्रचार से दूरी चर्चा का विषय है।