वैश्विक संक्रामक महामारी कोविड-19 के दौर में डॉक्टर सबसे अग्रिम मोर्चे पर कोरोना वायरस मरीजों की जान बचाने के संघर्ष कर रहे हैं। ये जीवनरक्षक डॉक्टर अक्सर सफेद कोट यानी व्हाइट एप्रिन के अलावा अक्सर हरे रंग के गाउन और नीले रंग के गाउन में नजर आते हैं। लेकिन क्या कभी आपने सोचा हैं कि लोगों की जिंदगी में खुशियों के रंग भरने वाले अस्पताल के ये भगवान के दूत अक्सर हरे या नीले रंग के लिबास में ही क्यों दिखते हैं? इतना ही नहीं अस्पताल का रंग नीरस सा क्यों होता है? क्या है इस हरे और नीले रंग के पीछे के असली कहानी और वैज्ञानिक कारण? साथ ही कब और क्यों बदला गया था डॉक्टरों का लिबास? तो आइए जानते हैं ...
इतिहास के पन्नों से : 1914 में बदला था डॉक्टरों का लिबास, जानिए सफेद से हरे और नीले रंग तक की कहानी
लोगों की जिंदगी में खुशियों के रंग भरने वाले अस्पताल के ये भगवान के दूत अक्सर हरे या नीले रंग के लिबास में ही दिखते हैं।
ऑपरेशन थियेटर में चिकित्सक और स्वास्थ्य एवं नर्सिंगकर्मी अक्सर हरे या नीले रंग के लिबास में ही दिखते हैं। अस्पताल के कमरों में सफेद रंग होता है। इतना ही नहीं, अस्पताल के पर्दे, नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारी भी नीले और हरे रंग के लिबास और यूनिफॉर्म में ही नजर आते हैं। इसकी एक विशेष वजह है। करीब 107 साल पहले डॉक्टरों का यह लिबास बदला गया था।
इससे पहले तक डॉक्टर ऑपरेशन थियेटर में भी अक्सर सफेद कपड़ों में ही नजर आते थे। हालांकि, कई डॉक्टर अब भी सफेद कोट में नजर आते हैं, लेकिन उनमें से अधिकतर ओपीडी में परामर्श सेवाएं देने वाले चिकित्सक और विशेषज्ञ चिकित्सक होते हैं। जबकि, ओटी में सेवाएं देने वाले ज्यादातर डॉक्टर, विशेषज्ञ सर्जन और नर्सिंगकर्मी हरे और नीले रंग के लिबास में नजर आते हैं।
1914 में बनाया गया था नियम
मेडिकल साइंस हिस्ट्री की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं के अनुसार, 1914 के बाद से डॉक्टरों का लिबास बदल गया। दरअसल, 1914 में एक प्रभावशाली डॉक्टर ने ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों के लिए हरे या नीले रंग का गाउन पहनने का नियम बनाया था। इतना ही नहीं अगर हम गौर से देखें तो ऑपरेशन थियेटर में या फिर अस्पतालों के कमरों में पर्दे भी हरे या नीले रंग के होते हैं। वहीं, डॉक्टरों के मास्क भी हरे रंग या नीले रंग के होते हैं। ऐसे में हर किसी के मन में ये सवाल तो उठता वाजिब है कि आखिर इन दो रंगों में ऐसा क्या खास है जो किसी और में नहीं।
तो ये है असली वजह
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