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कौन थे वीर सावरकर, इन्हें भारत रत्न देने की मांग पर क्यों उठा है सियासी तूफान

Sun, 20 Oct 2019 02:56 PM IST
बीबीसी Published by: रत्नप्रिया रत्नप्रिया Updated Sun, 20 Oct 2019 02:56 PM IST
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Why Bharat Ratna to Veer Savarkar demand by BJP created controversies in India
वीर सावरकर - फोटो : अमर उजाला

महाराष्ट्र चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने संकल्प पत्र में विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर - Veer Savarkar) को भारत रत्न दिलाने का वादा किया है। इस वादे के साथ ही सावरकर को लेकर चर्चाओं का दौर एक बार फिर से शुरू हो गया है। कुछ लोग इसके पक्ष में हैं तो कुछ विरोध में। 



कौन हैं वीर सावरकर? उन्हें भारत रत्न देने की बात का विरोध क्यों किया जा रहा है? सावरकर देश व देशवासियों के लिए 'हीरो' और 'विलेन' दोनों कैसे बन गए? इन सवालों के जवाब जानने के लिए आगे पढ़ें। 

Why Bharat Ratna to Veer Savarkar demand by BJP created controversies in India
वीर सावरकर - फोटो : SAVARKARSMARAK.COM

1883 में मुंबई (तत्कालीन बॉम्बे) में जन्मे वीर सावरकर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारी थे। इसके साथ ही वह एक राजनेता, वकील, लेखक और हिंदुत्व दर्शनशास्त्र के प्रतिपादक थे। मुस्लिम लीग के जवाब में उन्होंने हिंदु महासभा से जुड़कर हिंदुत्व का प्रचार किया था।

वर्ष 2000 में वाजपेयी सरकार ने तत्कालीन राष्ट्पति केआर नारायणन के पास सावरकर को भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' देने का प्रस्ताव भेजा था। लेकिन उन्होंने उसे स्वीकार नहीं किया था।

आगे पढ़ें, सावरकर पर क्यों है विवाद

Why Bharat Ratna to Veer Savarkar demand by BJP created controversies in India
वीर सावरकर - फोटो : SAVARKARSMARAK.COM

साल 1948 में महात्मा गांधी की हत्या के छठे दिन विनायक दामोदर सावरकर को गांधी की हत्या के षड्यंत्र में शामिल होने के लिए मुंबई से गिरफ्तार कर लिया गया था। हांलाकि उन्हें फरवरी 1949 में बरी कर दिया गया था।
 
विशेषज्ञ नीलांजन मुखोपाध्याय बताते हैं, "हम नहीं भूल सकते कि गांधी हत्याकांड में उनके खिलाफ केस चला था। वो छूट जरूर गए थे, लेकिन उनके जीवन काल में ही उसकी जांच के लिए कपूर आयोग बैठा था और उसकी रिपोर्ट में शक की सुई सावरकर से हटी नहीं थी।"

नासिक कलेक्टर की हत्या के सिलसिले में गिरफ्तारी

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Why Bharat Ratna to Veer Savarkar demand by BJP created controversies in India
वीर सावरकर - फोटो : SAVARKARSMARAK.COM

अपने राजनीतिक विचारों के लिए सावरकर को पुणे के फरग्यूसन कॉलेज से निष्कासित कर दिया गया था। साल 1910 में उन्हें नासिक के कलेक्टर की हत्या में संलिप्त होने के आरोप में लंदन में गिरफ्तार कर लिया गया था।

सावरकर पर शोध करने वाले निरंजन तकले बताते हैं, "1910 में नासिक के जिला कलेक्टर जैकसन की हत्या के आरोप में पहले सावरकर के भाई को गिरफ्तार किया गया था। सावरकर पर आरोप था कि उन्होंने लंदन से अपने भाई को एक पिस्टल भेजी थी, जिसका हत्या में इस्तेमाल किया गया था।"

अंडमान में 'काला पानी' और अंग्रेजों को माफीनामा

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वीर सावरकर - फोटो : SAVARKARSMARAK.COM

इसके बाद करीब 25 सालों तक सावरकर किसी न किसी रूप में अंग्रेजों के कैदी रहे। उन्हें 25-25 साल की दो अलग-अलग सजाएं सुनाई गईं और सजा काटने के लिए भारत से दूर अंडमान यानी 'काला पानी' भेज दिया गया। लेकिन यहां से सावरकर की दूसरी जिंदगी शुरू होती है। सेल्युलर जेल में उनके काटे 9 साल 10 महीनों ने अंग्रेजों के प्रति सावरकर के विरोध को बढ़ाने के बजाय समाप्त कर दिया।

निरंजन तकले बताते हैं, "गिरफ्तार होने के बाद असलियत से उनका सामना हुआ। 11 जुलाई 1911 को सावरकर अंडमान पहुंचे और 29 अगस्त को उन्होंने अपना पहला माफीनामा लिखा। इसके बाद 9 सालों में उन्होंने 6 बार अंग्रेजों को माफी पत्र दिए। कई कारणों से उन्हें जेल में अन्य कैदियों की तुलना में कई रियायतें भी मिलीं।" सावरकर ने अपनी आत्मकथा में लिखा था, "अगर मैंने जेल में हड़ताल की होती तो मुझसे भारत पत्र भेजने का अधिकार छीन लिया जाता।"

सावरकर की हिंदुत्व की अवधारणा

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