सपने तो सभी देखते हैं पर उन्हें सच कर दिखाने का जज्बा किसी-किसी में होता है। समय-समय पर हमें ऐसी सच्ची कहानियां सुनने को मिलती हैं, जो इस बात को सच साबित करती हैं। ऐसी ही एक सच्ची कहानी हम आपको बता रहे हैं।
पिता और बेटे के संघर्ष की कहानी, ऐसे बने विपिन PCS अधिकारी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कहते हैं ना कि अगर मन में कुछ करने की ठान लो तो उसे किसी भी तरह से पूरा किया जा सकता है। ऐसा ही विपिन के साथ भी हुआ। एक छोटे से गांव में रहने के बावजूद भी इन्होंने अपने सपने को पूरा किया।
- विपिन शिवहरे उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के एक छोटे से गांव के निवासी हैं।
- उनके घर की आर्थिक स्थिति थोड़ी अच्छी नहीं थी।
- उनके पिता घर-घर जाकर दूध बेचने का काम करते हैं।
- उन्होंने अपने बेटे को एक सफल इंसान बनाने के लिए हर मुमकिन प्रयास किया।
- जब पिता को पता चला कि उनका बेटा यूपीपीसीएस में चौथी स्थान हासिल कर चुका है उस वक्त उनकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि वह अपनी खुशी किस तरह से जाहिर करें।
पिता और बेटे के संघर्ष की कहानी-
विपिन की इस सफलता की खुशी सबसे ज्यादा उनके पिता को हुई। उनके पिता कहते हैं कि जब गांव के व्यक्ति अपने बच्चों को मोटरसाइकिल पर बैठाकर स्कूल में ले जाया करते थे, तब मैं साइकिल पर दूध का कंटेनर लिए लोगों के घर में दूध बेचने जाया करता था। लेकिन मैंने कभी हार नहीं मानी और अपने बच्चे को पढ़ाने के लिए हमेशा कोशिश करता रहा।
ये भी पढ़ें- UP Teacher Vacancy 2020: राज्य में 15000 से भी ज्यादा पदों पर सरकारी टीचर की बंपर भर्ती, आवेदन प्रक्रिया शुरू
विपिन की शिक्षा-
विपिन ने अपनी आठवीं कक्षा तक की पढ़ाई गांव में स्थित सरस्वती विद्या मंदिर से की और हाईस्कूल कोंच के आरआरपी इंटर कालेज से पास किया। इसके बाद उरई के सरस्वती विद्या मंदिर सें दाखिला लिया और वर्ष 2006 में प्रथम श्रेणी से इंटरमीडिएट पास किया। विपिन शिवहरे वर्तमान में मध्य प्रदेश सरकार के लेखा विभाग में ऑडिट ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं। इसके पहले कुछ वर्ष उन्होंने स्टेट बैंक में भी नौकरी की है।
मां कुसुम देवी ने बताया कि उनका बेटा हमेशा से ही पढ़ाई में अच्छा रहा है। जब भी कभी रिश्तेदार आते तो वह कुछ समय निकालकर औपचारिक मुलाकात करके पढ़ने बैठ जाया करता था। आज वही मेहनत रंग लाई है।
ये भी पढ़ें- SUCCESS STORY: पहले घर-खेत सब रखे गिरवी, बाद में नौकरी छोड़ ऐसे बनें IAS अधिकारी
कमेंट
कमेंट X