{"_id":"5c55a33ebdec2273896350c2","slug":"know-about-quintiles-ceo-success-story","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"हाथ से कैमरा छूटने पर आया था गुस्सा, आज हैं इस बड़ी कंपनी के CEO, जानें पूरी कहानी","category":{"title":"Education","title_hn":"शिक्षा","slug":"education"}}
हाथ से कैमरा छूटने पर आया था गुस्सा, आज हैं इस बड़ी कंपनी के CEO, जानें पूरी कहानी
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: Garima Garg
Updated Wed, 06 Feb 2019 05:58 PM IST
विज्ञापन
1 of 5
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
Link Copied
स्कूल से शुरू हुआ सिलसिला आज भी जारी है। लेईका कैमरों से ली गई छवियां उनके लिए एक रोमांस है। दुर्लभ चीजें उन्हें आकर्षित करती हैं। फोटोग्राफी में दिलचस्पी होने के कारण वह कैमरों के करीब आए। उन्होंने 1990 में अमेरिका में एक दुकान से पहला कैमरा खरीदा था। अचानक उनकेे हाथ से वह कैमरा गिर गया। इस बात को लेकर उन्हें खुद पर बहुत गुस्सा आया था। आज उनके पास 1925 और 1970 के बीच निर्मित 35 से अधिक लेईका कैमरे हैं।
2 of 5
success
- फोटो : फाइल फोटो
इन कैमरों से ली गई छवियां उन्हें रोमांस से भर देती हैं। स्कूल के जमाने से चीजों को इकट्ठा करने का उनका शौक जुनून के हद तक पहुंच चुका है। मूलरूप से अहमदाबाद के रहने वाले फरजान इंजीनियर को दुर्लभ चीजों को संग्रह करने का शौक अपनी मां को देखकर जगा। उनकी मां तरह-तरह के फर्नीचरों का संग्रह किया करती थीं।
3 of 5
फार्मास्युटिकल साइंसेज में पीएचडी करने वाले 54 वर्षीय इंजीनियर ने अपने स्कूल के जमाने में 1950 और 60 के दशक से पुराने फोनोग्राफ के पुराने रिकॉर्ड (एलपी) को इकट्ठा करना शुरू किया। उनके पास एक हजार से अधिक एलपी हैं। इसके बाद उन्होंने अपने संग्रह में लेईका कैमरे, पुराने फर्नीचर और कला को शामिल किया। इंजीनियर को फोटोग्राफी में काफी दिलचस्पी थी। इंजीनियर कहते हैं, ''लेईका कैमरा आर्ट डेको पीरियड का एक आइकन है।
विज्ञापन
विज्ञापन
4 of 5
सबसे खूबसूरत यांत्रिक चीज, अपनी शैली का सबसे अच्छा। यह द्वितीय विश्व युद्ध और उसके बाद के समय की कुछ सबसे प्रतिष्ठित छवियों को समाहित करता है।'' इंजीनियर के सबसे कीमती लेईका कैमरों में से एक है रिपोर्टर। लेईका ने 1930 के दशक में इस कैमरे का निर्माण शुरू किया था और जैसा कि नाम से पता चलता है, प्रेस द्वारा इसका बड़े पैमाने पर उपयोग किया गया था। क्लासिक 35 मिमी लाईका कैमरे के इस संशोधन को एक बार में 250 एक्सपोजर को शूट करने के लिए डिजाइन किया गया था।
विज्ञापन
5 of 5
कुल मिलाकर, 983 ऐसे कैमरे तैयार किए गए थे और आज केवल कुछ ही अस्तित्व में हैं। उनके पास लेईका सी नामक कैमरा भी है, जो दुनिया में पहला ऐसा कैमरा था, जिसमें लेंस को कैमरे से मिलान नहीं करना था। उनके पास 1954 का एक लेईका कैमरा भी है, जो एक दुर्लभ स्टीरियो लेंस से सुसज्जित है, जिसे स्टेमर कहा जाता है। इंजीनियर के पास लेईका ग्राइल का संग्रह भी है। वे अपने इस मूल्यवान संग्रह की अच्छी तरह देखभाल करते हैं।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X