जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में गार्ड की नौकरी करने वाले रामजल मीणा अब वहीं के स्टूडेंट बन गए हैं। रामजल ने जेएनयू की प्रवेश परीक्षा पास कर ली है। अब रामजल जेएनयू से रशियन लैंग्वेज की पढ़ाई करेंगे। लेकिन इतने से भी वह संतुष्ट नहीं हैं। उनका सपना यूपीएससी क्वालिफाई कर आईएएस बनने का है। जेएनयू में गार्ड की नौकरी से पहले रामजल ने मजदूरी भी की है। उनके तीन बच्चे भी हैं। आईए जानते हैं उनकी इस सफलता की कहानी...
पहले मजदूरी की, फिर JNU में गार्ड की नौकरी, अब बने वहीं के स्टूडेंट, जानें रामजल की सफलता की कहानी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मूल रूप से राजस्थान के करौली जिले में एक गांव के रहने वाले रामजल मीणा जेएनयू के मेन गेट पर गार्ड की नौकरी करते थे। उन्होंने करीब 5 साल गार्ड की नौकरी की। रामजल बताते हैं कि जेएनयू के गेट पर खड़े होकर वह अक्सर स्टूडेंट्स को पढ़ते देखा करते। उन्हें देखकर उनके मन में जेएनयू के गेट से हटकर वहां के क्लासरूम में पहुंचने की चाहत जगी।
रामजल ने कई साल पहले राजस्थान यूनिवर्सिटी में बीएससी में दाखिला लिया था। लेकिन घर की जिम्मेदारियों के कारण वह पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए। पिता के साथ मिलकर मजदूरी की और अपनी तीन बहनों की शादी की। साल 2003 में रामजल की भी शादी हो गई। उनके तीन बच्चे हैं। जेएनयू में गार्ड की नौकरी करते हुए ही रामजल ने राजस्थान से बीए की परीक्षा पास की। अभी एमए कर रहे हैं।
रामजल ने बताया कि अब जब वह जेएनयू की प्रवेश परीक्षा पास कर चुके हैं, उन्हें वहीं गार्ड की नौकरी करते हुए क्लास करने की अनुमति मिल गई है। तैयारी के बारे में रामजल कहते हैं कि रोजाना 8 से 10 घंटे की ड्यूटी के दौरान वह अपने साथ किताबें भी रखते थे। बीच-बीच में समय निकालकर वह पढ़ा करते थे। उनकी लगन देख यूनिवर्सिटी के कुछ प्रोफेसर और स्टूडेंट्स भी उन्हें प्रोत्साहित करने लगे। उनके प्रोत्साहन से रामजल के ईरादों को और मजबूती मिली और उन्होंने प्रवेश के लिए आवेदन कर दिया। परीक्षा दी और मेरिट लिस्ट में अपना नाम देख कर उन्हें बेहद खुशी मिली।
आईएएस बनना है सपना
अब रामजल यूपीएससी की परीक्षा पास कर आईएएस ऑफिसर बनना चाहते हैं। देश की सेवा के साथ-साथ अपने माता-पिता, पत्नी और बच्चों को बेहतर जीवन देना चाहते हैं। अभी रामजल की एक बेटी नौवीं और दूसरी सातवीं कक्षा में पढ़ रही है। बेटा चौथी कक्षा में है। वह सभी को उच्च शिक्षा देना चाहते हैं। रामजल कहते हैं कि मैं नहीं चाहता कि मेरे होनहार बच्चों को किसी तरह की कमी के कारण मेरी तरह मजदूरी करनी पड़े। रामजल अपने बच्चों के साथ बैठकर भी पढ़ाई करते हैं। कहते हैं कि पढ़ाई ही एकमात्र ऐसा माध्यम है जो हमारी किस्मत बदल सकता है।
कमेंट
कमेंट X