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Education for Bharat: एआई को केवल 'एप' न मानें, कोविड की सीख और व्यावहारिक ज्ञान ही संवारेगा करियर: विशेषज्ञ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: जागृति
Updated Sat, 06 Dec 2025 03:45 PM IST
सार
Amar Ujala Education for Bharat: एजुकेशन फॉर इंडिया के पांचवे पैनल में कैंपस से करियर: कौशल, एआई और रोजगार क्षमता पर चर्चा हुई। चलिए जानते हैं इसमें विशेषज्ञों ने क्या कहा?
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अमर उजाला एजुकेशन फॉर भारत में बोले विशेषज्ञ।
- फोटो : अमर उजाला
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अमर उजाला 'एजुकेशन फॉर भारत-2025' कॉन्क्लेव के 'कैंपस टू करियर' सत्र में शिक्षा और उद्योग जगत के दिग्गजों ने एआई के उपयोग और सीखने के तरीकों पर एक राय साझा की। पैनल चर्चा में डॉ. जवाहर सूरीशेट्टी, राजेंद्र मेहता और पद्मा श्रीनिवासन ने जोर देकर कहा कि तकनीक का मकसद जीवन को आसान बनाना होना चाहिए, न कि जटिल।
एआई सिर्फ एक एप्लीकेशन नहीं
आरआईएसयू के कुलपति डॉ. जवाहर सूरीशेट्टी ने चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि एआई के जरिए जीवन को आसान बनाने की दिशा में काम होना चाहिए। इसे केवल एक एप्लीकेशन की तरह इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि इसे समस्याओं को सुलझाने वाले टूल के रूप में देखना जरूरी है।
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अमर उजाला एजुकेशन फॉर भारत में बोले विशेषज्ञ।
- फोटो : अमर उजाला
रटने की बजाय सीखने पर हो जोर
डीपीएस आरके पुरम की पूर्व प्रिंसिपल पद्मा श्रीनिवासन ने छात्रों की सीखने की प्रक्रिया और अभिभावकों की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि छात्रों को रटने पर नहीं, बल्कि व्यावहारिक तौर पर चीजों को सीखने पर ध्यान देना चाहिए। अगर कहीं दिक्कत आए, तो टीचर की मदद लेकर चीजों को बेहतर समझना चाहिए। अभिभावकों को संदेश देते हुए कहा कि पैरेंट्स की भी जिम्मेदारी है कि वे दुनिया में क्या चल रहा है, उससे अवगत रहें। बच्चे को उसी दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें।
कोविड काल की सीख को आगे बढ़ाना होगा
सुजलॉन ग्रुप के सीएचआरओ राजेंद्र मेहता ने महामारी के दौरान आए डिजिटल बदलावों को एक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि कोविड के दौरान हम हर तरह की लर्निंग को ऑनलाइन लेकर आए, यह हमारी बड़ी जीत थी। उस दौरान शिक्षकों ने नई तकनीक का बेहतर इस्तेमाल सीखा। हमें कोविड के दौरान मिली उस सीख को अब आगे इस्तेमाल करते हुए बढ़ना चाहिए, न कि पुरानी ढर्रे पर लौटना चाहिए।
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