दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान अपने सात दशक पूरे कर चुका है और निरंतर विस्तार और सुधार कर रहा है। 1947 में स्वाधीन होने के बाद राज्यों के एक संघ के तौर पर भारत ने अपना एक नया संविधान तैयार करना शुरू किया। संविधान सभा द्वारा भारतीय संविधान को 26 नवंबर, 1949 को ग्रहण किया गया था। इस दिन को संविधान दिवस के तौर पर जाना जाता है। वहीं, 26 जनवरी, 1950 को भारत ने अपना संविधान लागू किया था। उस दिन को देश में गणतंत्र दिवस के तौर पर मनाया जाता है।
Constitution Day: 72 साल का हुआ दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान, इन 10 देशों के कानूनी प्रावधानों से मिलकर बना है भारतीय संविधान, जानिए अहम बातें
Constitution Day of India: दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान अपने सात दशक पूरे कर चुका है और निरंतर विस्तार और सुधार कर रहा है। 72 वर्ष पूर्व बनकर तैयार हुए भारतीय संविधान में आजादी के बाद से समय-समय पर तत्कालीन आवश्यकताओं के अनुसार कई संशोधन भी किए गए।
कार्यकारी शक्ति केंद्रीय मंत्री परिषद में निहित
संविधान की धारा-74 (1) में यह व्यवस्था की गई है कि राष्ट्रपति की सहायता करने तथा उसे सलाह देने के लिए एक मंत्री परिषद होगी, जिसके प्रमुख प्रधानमंत्री कहलाते हैं। राष्ट्रपति मंत्री परिषद सलाह के अनुसार अपने कार्यों का निष्पादन करते हैं। इस प्रकार वास्तविक कार्यकारी शक्ति केंद्रीय मंत्री परिषद में निहित है, जिसके प्रमुख प्रधानमंत्री होते हैं।
डॉ आंबेडकर थे संविधान निर्मात्री सभा के अध्यक्ष
डॉ भीमराव आंबेडकर भारत की संविधान निर्मात्री सभा के अध्यक्ष थे। उनके नेतृत्व में संविधान निर्मात्री सभा के सदस्यों ने विभिन्न देशों के संविधानों को पढ़ा और उनके प्रमुख प्रावधानों, नियमों और श्रेष्ठ शासन व्यवस्थाओं को अपने संविधान में शामिल किया। हालांकि, भारतीय संविधान में आजादी के बाद से समय-समय पर तत्कालीन परिस्थितियों और आवश्यकताओं के अनुसार कई बार संशोधन भी किए गए। आइए जानते हैं कि संविधान से जुड़ीं प्रमुख व्यवस्थाओं और प्रावधानों के बारे में और जानते हैं कि किस देश से है उनका नाता ...
संयुक्त राज्य अमेरिका (USA)
भारतीय संविधान में अमेरिका के संविधान से संविधान की सर्वोच्चता, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, निर्वाचित राष्ट्रपति एवं उस पर महाभियोग, उपराष्ट्रपति, उच्चतम एवं उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों को हटाने की विधि एवं अनुच्छेद-360 के तहत वित्तीय आपातकाल, मौलिक अधिकार, न्यायिक पुनरावलोकन की व्यवस्था को शामिल किया गया है।
ब्रिटेन (Britain)
भारतीय संसदीय प्रणाली ब्रिटेन जैसी है। ऐसा इसलिए कि ब्रिटिश संविधान से एकल नागरिकता, कानून निर्माण प्रक्रिया, विधि का शासन, मंत्रिमंडल प्रणाली, न्यायालय के विशेषाधिकार, संसदीय विशेषाधिकार और द्वि-सदनवाद को लिया गया है।
ऑस्ट्रेलिया (Australia)
ऑस्ट्रेलिया से संविधान की प्रस्तावना की भाषा, समवर्ती सूची का प्रावधान, केंद्र एवं राज्य के बीच संबंध तथा शक्तियों का विभाजन, व्यापार-वाणिज्य और संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक आदि व्यवस्थाओं को लेकर भारतीय संविधान में जोड़ा गया है।
जर्मनी (Germany)
भारतीय संविधान में आपातकाल के समय के अधिकारों के संबंध में प्रावधान यूरोपीय देश जर्मनी के संविधान से लिए गए हैं। इसमें राष्ट्रपति के पास मौलिक अधिकार के निलंबन संबंधी शक्तियां हैं। आपात समय में सरकार मूलभूत अधिकारों में बदलाव कर सकती है। हालांकि, आपात उपबंधों को तीन भागों में बांटा गया है। इनमें अनुच्छेद-352 के तहत राष्ट्रीय आपात स्थिति, अनुच्छेद-356 के तहत राज्यों में संवैधानिक तंत्र की विफलता या राष्ट्रपति शासन की स्थिति और अनुच्छेद-360 के तहत वित्तीय आपात स्थिति के प्रावधान हैं।
सोवियत संघ (Soviet Union)
तत्कालीन सोवियत संघ यानी रूस के संविधान से भारतीय संविधान में मौलिक कर्तव्यों के प्रावधान, मूल कर्तव्यों और प्रस्तावना में सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय का आदर्श लिए गए हैं। भारतीय संविधान नागरिकों के अधिकारों और कर्तव्यों को संतुलित करता है।
जापान (Japan)
भारतीय संविधान में जापान से विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया को लिया गया है। भारतीय संविधान संसदीय संप्रभुता और न्यायिक सर्वोच्चता के स्वस्थ समन्वय को अपनाता है। विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया वह प्रक्रिया है जिसमें कोई भी बिल संसद से पारित होने के बाद और राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होने के बाद फिर वह कानून भले ही उचित हो या न हो, लागू होने के बाद मान्य होगा। हालांकि, अनुच्छेद-21 के अंतर्गत न्यायपालिका के कई मसलों पर विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया को कानूनन चुनौती देने को सर्वोच्चता दी है।
दक्षिण अफ्रीका (South Africa)
भारतीय संविधान में संशोधन की प्रक्रिया संबंधी प्रावधान, राज्यसभा में सदस्यों का निर्वाचन प्रणाली आदि दक्षिण अफ्रीका के संविधान से लिए गए हैं। राज्यसभा सदस्य का कार्यकाल छह वर्ष का रहता है। विभिन्न राज्य की विधानसभाओं में चुने गए विधायक अपने राज्य से राज्यसभा सदस्यों के निर्वाचन के लिए मतदान करते हैं।
कमेंट
कमेंट X