Amar Ujala Samwad 2025: अमर उजाला के अपने प्रतिष्ठित वैचारिक मंच 'अमर उजाला संवाद' पर कई जानी-मानी हस्तियां आईं। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के गोमतीनगर के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में इस कार्यक्रम की शानदार शुरुआत हुई। शिक्षा और कौशल के लिए निर्धारित सत्र में प्रो. अनिल सहस्रबुद्धे, डॉ. हरिओम और डॉ. कृष्णमूर्ति ने शिक्षा और कौशल (स्किल) के बीच बेहतर तालमेल या समन्वय को लेकर विचार-विमर्श किया।
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संवाद के मंच पर शिक्षा और कौशल के तालमेल पर हुई चर्चा
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इस सत्र के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार के व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास एवं उद्यमिता विभाग में प्रमुख सचिव डॉ हरिओम ने कौशल विकास और स्किल को लेकर अपनी बात रखीं।
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कौशल विकास में सॉफ्ट स्किल्स को भी जोड़ना चाहिए
- फोटो : Amar Ujala Youtube
कौशल विकास के लिए सॉफ्ट स्किल जरूरी
डॉ. हरिओम ने कहा कि कौशल विकास को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि जैसे प्रोजेक्ट प्रवीण कक्षा 9 से शुरू हो रहा है, वैसे ही स्कूली शिक्षा में शुरुआत से ही स्किल्स पर ध्यान दिया जाना चाहिए। भले ही बहुत छोटे बच्चे तकनीकी कौशल (technical skills) को पूरी तरह न समझ सकें, लेकिन सॉफ्ट स्किल्स जैसे संवाद, टीमवर्क और आत्म-विश्वास को वे आसानी से अपना सकते हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि कौशल विकास में सॉफ्ट स्किल्स को भी अनिवार्य रूप से जोड़ा जाना चाहिए।
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Skilling
- फोटो : Freepik
"प्रवीण" पायलट प्रोजेक्ट भी चल रहा
डॉ हरिओम ने आगे कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने स्कूली शिक्षा को कौशल से जोड़ने के लिए "प्रवीण" नामक एक पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत की थी, जो 2016 से चल रहा है। इस परियोजना के तहत 2024-25 में 200 सरकारी इंटर कॉलेजों में 25,000 से अधिक छात्रों का नामांकन किया गया है और इसके लिए 100 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। इस प्रोजेक्ट में कक्षा 9वीं और 11वीं के छात्रों को किसी एक विशेष कौशल से प्रशिक्षित करने के लिए एक अभियान चलाया गया है। वर्तमान में, उत्तर प्रदेश के 60 जिलों को इस योजना के तहत कवर किया गया है और जल्द ही इसे राज्य के सभी जिलों में लागू किया जाएगा।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : freepik
डॉ हरिओम के बारे में जानिए
डॉ. हरिओम, जो 1997 बैच के आईएएस अधिकारी हैं, वर्तमान में उत्तर प्रदेश सरकार के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमिता विभाग में प्रमुख सचिव के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के एक छोटे से गांव कटारी में जन्मे डॉ. हरिओम ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा के बाद उच्च शिक्षा इलाहाबाद (जो अब प्रयागराज कहलाता है) से पूरी की। उन्होंने UPSC परीक्षा को सफलता से पास किया और 1997 में IAS के लिए चयनित हुए।
बचपन से ही उन्हें ग़ज़लें, गीत, भजन और कीर्तन का गहरा शौक रहा है, और इस रुचि को उन्होंने आज भी बनाए रखा है।
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