जितेंद्र गोगी की हत्या के बाद भी अलीपुर स्थित उसके गांव में डर का माहौल है। शुक्रवार को रोहिणी कोर्ट में हत्या के बाद से उसके गांव को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। चप्पे चप्पे पर पुलिसकर्मी व अर्धसैनिक बल तैनात है और वह जितेंद्र गोगी के घर आने जाने वालों पर नजर रख रहे हैं। गांव के लोग खुलकर कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं। उनका कहना है कि जितेंद्र के किए आपराधिक वारदातों को लेकर अकसर पुलिस उनके गांव में आती जाती रहती थी, अब उसकी मौत के बाद यह सिलसिला रूक जाएगा।
छावनी में तब्दील हुआ गांव: गोगी के ग्राम में अब भी है डर का माहौल, ग्रामीण बोले- उसके जीते जी हमेशा सताता था यह डर
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मौत के बाद भी गोगी के घर आने वालों पर पुलिस की नजर
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि गोगी के घर पर आने वाले हर एक शख्स पर पुलिस की नजर है। शुक्रवार को गोगी की हत्या के बाद से ही उसके गांव में पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों को तैनात कर दिया गया है। गोगी की मौत की खबर मिलते ही उसके घर पर लोगों का आने का सिलसिला शुरू हो गया। शनिवार सुबह से ही दस पंद्रह की टोली में लड़के गोगी के घर आ जा रहे हैं। जिन पर पुलिस लगातार नजर रख रही है। पुलिस गोगी के घर आने जाने वालों की पहचान कर रही है। पुलिस उनका वीडियाग्राफी भी करवा रही है।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि गोगी के घर आपराधिक पृष्टिभूमि के लोग भी आ रहे हैं। जिनकी वीडियोग्राफी करवाकर उनकी पहचान करने में जुटी है। आला पुलिस अधिकारियों ने थाना पुलिस को साफ तौर पर निर्देश दिया है कि इस दौरान छोटी सी छोटी शिकायत पर तुरंत कार्रवाई करें।
बचपन में गोगी को वॉलीबाल खेलने का शौक था
जितेंद्र गोगी का घर अलीपुर गांव छोटा शिव मन्दिर के पास है। गांव वालों मुताबिक जितेंद्र गोगी के पिता मेहर सिंह की वर्ष 2010 में कैंसर की बीमारी से मौत हो चुकी है। परिवार में उसकी मां पदमेश्वरी, बड़ा भाई रविंद्र मान और बहनें हैं। मेहर सिंह ठेकेदार थे जबकि रविंद्र के कई टेंपो हैं, जिसे वह चलवाता है। लोगों ने बताया कि जितेंद्र को बचपन में वॉलीबाल का शौक था लेकिन 17 साल के उम्र में कंधे की चोट की वजह से उसने खेलना बंद कर दिया।
कॉलेज जाने के बाद वह छात्र राजनीति में उसकी दिलचस्पी हो गई थी। श्रद्धानंद कॉलेज में पढ़ने के दौरान उसकी अपनी जिगरी दोस्त ताजपुर गांव निवासी सुनील मान उर्फ टिल्लू से दुश्मनी हो गई। उसके बाद से वह आपराधिक वारदातों को अंजाम देने लगा। वर्ष 2010 में पिता की मौत के बाद से वह हत्या, उगाही जैसे संगीन अपराध को अंजाम देने लगा।
लोगों ने बताया कि उसकी मां चाहती थी कि वह आत्मसमर्पण करे और गैंगवार खत्म हो। इस वजह से वह पिछले पांच साल से अपने बेटे से बात भी नहीं कर रही थी। वर्ष 2017 में उसने रंजिश की वजह से देवेंद्र प्रधान की हत्या कर दी थी। वर्ष 2018 में बुराड़ी में हुए गैंगवार में उसका नाम सुर्खियों में आया। गैंगवार में तीन लोगों की हत्या हो गई और पांच घायल हो गए। 2020 में उसका अहम सहयोगी कुलदीप उर्फ फज्जा, रोहित और कपिल को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। गांव के लोग बताते हैं कि टिल्लू और गोगी की दुश्मनी बहुत पुरानी है और इनके बीच गैंगवार में अब तक 40 लोगों की हत्या हो चुकी है। डेढ़ साल पहले दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उसे गुरुग्राम से गिरफ्तार किया लेकिन आज भी उसके गैंग के सदस्य वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।