टीकरी बॉर्डर पर पुलवामा आतंकी हमले की दूसरी बरसी पर शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि दी गई। किसानों ने देर शाम यहा पर कैंडल मार्च निकाल कर वीर सपूतों को याद किया। 14 फरवरी 2019 को पुलवामा आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। जबकि 70 अन्य जवान घायल हो गए थे। जिसके बाद भारत ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में घुसकर बालाकोट एयरस्ट्राइक को अंजाम दिया था।
पुलवामा में शहीद हुए वीर सपूतों को कैंडल मार्च निकालकर किसानों ने दी श्रद्धांजलि, देखें तस्वीरें
किसानों ने कहा कि देश की सेना में तैनात अधिकतर सिपाही देश के दूर-दराज बसे किसी गांव में पैदा हुआ होता है। जिनके माता-पिता ज्यादातर किसान होते हैं। इसलिये इस आंदोलन से किसानों के साथ-साथ देश के जवानों का भी गहरा रिश्ता है। लेकिन केंद्र सरकार के अधीन उनकी नौकरी होने के कारण वह खुलकर सरकार के खिलाफ खड़े नहीं हो रहे। यदि देश का जवान खुलकर किसान आंदोलन का समर्थन कर दे तो सरकार को उसके फैसलों से पीछे धकेलना आसान होगा।
वहीं गाजीपुर बॉर्डर पर भी पुलवामा हमले में शहीद हुए सैनिकों को श्रद्धांजलि दी गई। किसानों ने कहा कि देश की रक्षा के लिए सैनिकों ने अपने प्राण निछावर किए हैं। उनके बलिदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता।
शहादत दिवस के दिन धरना स्थल के पास बने मंच का संचालन पूर्व सैनिकों ने किया। संचालन शुरू होने से पहले पूर्व सैनिकों और किसानों ने राष्ट्रगान भी गया। गाजीपुर बॉर्डर पर पहुंचे पूर्व सैनिक गुरदीप सिंह ने कहा कि सैनिक सरहद पर खड़े होकर देश की रक्षा कर रहे हैं तो वही किसान दिल्ली की सीमाओं पर डट कर अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के तीनों कृषि कानूनों से सभी लोगों को नुकसान होगा। सरकार को जल्द से जल्द कानूनों को वापस ले लेना चाहिए। सिंह ने मंच से किसानों से आह्वान करते हुए कहा कि वह आंदोलन को इसी प्रकार चलाते रहें। एक न एक दिन उनकी समस्या का समाधान जरूर निकलेगा।
पूर्व सैनिक बैठे अनशन पर
किसान आंदोलन के 79 वें दिन रविवार को मंच पर 13 पूर्व सैनिक अनशन पर बैठे। अनशन पर बैठने वाले सूबेदार मेजर जयप्रकाश मिश्रा, हरवेंद्र सिंह राणा, बोध नाथ मिश्रा, बलविंदर सिंह, चरनपाल सिंह, गुरदीप सिंह, चन्नण सिंह, सूबेदार गुरुचरण सिंह, अनुराग लठवाल, राजन भाष्कर, मणि देव चतुर्वेदी, दूरबीन यादव, देवराज पहलवान ने 24 घंटे का अनशन रखा।