शायद उर्वशी जैसी महिलाएं ही असल मायने में सुपर हीरो होती हैं। एक वक्त जिस परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी बुरी थी कि एक गृहिणी को बाहर निकल कर काम करना पड़ा आज उसी की बदौलत परिवार और वो खुद एक सम्माजनक स्थिति में है। वही उर्वशी जिसने आर्थिक मुसीबतों में घिरे अपने परिवार को छोले-कुल्चे का ठेला लगाकर संभाला था।
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urvashi yadav
- फोटो : हिंदुस्तान टाइम्स
उर्वशी जैसी महिलाएं अपने काम से उन सभी के लिए मिसाल हैं जो विपरीत परिस्थितियां आने पर घबरा जाते हैं और हार मान लेते हैं। उर्वशी के जीवन में बुरा दौर तब आया जब उनके पति का एक्सीडेंट हो गया और डॉक्टरों ने कहा कि अब उनके पति बेड से नहीं उठ पाएंगे। एक समय उनके पति परिवार के लिए कमाने वाले मुख्य सदस्य थे। उनके दोनों बच्चे गुड़गांव के नामी स्कूलों में पढ़ते हैं। वो खुद एक टीचर थीं। लेकिन उन्हें लगने लगा कि उनकी कमाई से वो अपना घर नहीं चला सकेंगी और उनके बच्चों को आर्थिक तंगी से स्कूल भी बदलना पड़ेगा।
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- फोटो : सोशल मीडिया
यही सब सोचते हुए उन्होंने अपना खुद का काम करने की सोची लेकिन इसके लिए वो किसी के सामने हाथ नहीं फैलाना चाहती थीं। इसलिए उन्होंने कोई रेस्त्रां खोलने के बजाय छोले कुलचे का ठेला चलाना सही समझा। उर्वशी को खाना बनाना पसंद है और उन्होंने अपने इसी हुनर को फायदे के लिए इस्तेमाल करने की सोची।
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- फोटो : सोशल मीडिया
उर्वशी बताती हैं कि उन्हें ठेला चलाने का खयाल तब आया जब एक बार वो अपने पति के लिए और दवाइयां लेने आई थीं और उन्होंने सड़क किनारे एक ठेला देखा। उन्होंने ठेले वाले को देखकर उससे बात करनी शुरु कर दी और तब उन्हें लगा कि उन्हें खुद का काम शुरु करना चाहिए।
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- फोटो : सोशल मीडिया
उर्वशी ने सारा हिसाब-किताब लगाया और पाया कि उनकी सैलरी से ठेला खरीदा जा सकता था और काम शुरु किया जा सकता था। उर्वशी के पति ने उसके इस आइडिया में उसका साथ दिया लेकिन उसके बच्चे, ससुर और अन्य परिवार के सदस्य उसके इस विचार से सहमत नहीं थे। लेकिन फिर भी उसने इस विचार को आगे ले जाने की सोची।