यूनेस्को द्वारा वर्ल्ड हेरिटेज में शुमार उत्तराखंड स्थित फूलों की घाटी आपदा के बाद एक बार फिर पर्यटकों से गुलजार होने लगी है। विगत एक जून को घाटी के खुलने के बाद एक माह में 90 विदेशी सैलानियों समेत 1305 पर्यटक फूलों के दीदार को पहुंच चुके हैं। यह संख्या तब है जबकि घाटी में अभी पर्याप्त संख्या में फूल नहीं खिले हैं।
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valley of flowers
- फोटो : अमरउजाला
यहां फ्लावरिंग का सबसे उपयुक्त समय 15 जुलाई से 15 अगस्त माना जाता है। अमर उजाला संवाददाता प्रमोद सेमवाल और फोटो पत्रकार मनोज रावत ने फूलों की घाटी का हाल जाना। पेश है लाइव रिपोर्ट-
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कैसे जाएं फूलों की घाटी
सबसे पहले आपको गोविंदघाट पहुंचना होगा। यहां से पुलना तक 3 किमी तक वाहन से और फिर यहां से घांघरिया तक दस किमी पैदल दूरी तय कर पहुंचें। यहां से दो रास्ते जाते हैं। एक फूलों की घाटी और एक हेमकुंड साहिब। हम दो सो मीटर चलने के बाद फूलों की घाटी के रास्ते पर चल पड़े।
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घाटी सुबह सात बजे से दोपहर दो बजे तक पर्यटकों के लिए खुलती है। नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क चेक पोस्ट पर नाम-पते दर्ज करवाकर हम भी घाटी की ओर बढ़ गए। शुरुआती रास्ता बुग्याली क्षेत्र से गुजरता है। करीब तीन सौ मीटर आगे गदेरे में रास्ता तहस-नहस पड़ा है।
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करीब तीन सौ मीटर आगे गदेरे में रास्ता तहस-नहस पड़ा है। अभी गदेरे में पानी है, पर बरसात में पानी बढ़ने पर घाटी तक पहुंच मुश्किल हो जाएगी। गदेरा पार कर हम दूसरे छोर पर पहुंचे। यहां करीब तीन सौ मीटर के दायरे में रागा प्रजाति के एबिज पिंडरो के पेड़ों का घना जंगल फैला है। घाटी का रास्ता इसी जंगल के बीच से गुजरता है। रास्ता सही हालत में है।