डोईवाला ब्लॉक के रानीपोखरी न्याय पंचायत क्षेत्र के अंतर्गत सूर्यधार बांध से लगभग तीन किमी आगे सैबुवाला गांव के पास बनी कृत्रिम झील बड़ी तबाही का कारण बन सकती है। झील का निर्माण पीएमजीएसवाई खंड नरेंद्र नगर के अंतर्गत इठराना-कालबना-कुखुई-मोटर मार्ग के निर्माण कार्य से निकले मलबे के नदी में गिराए जाने के कारण हुआ है।
क्या फिर मचेगी तबाही: सैबुवाला में बनी कृत्रिम झील, दिल्ली-यमुनोत्री हाईवे धंसने का खतरा बढ़ा, सुरक्षा दीवार धंसी
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इस घटना को लेकर ग्रामीण जलविद्युत निगम पर सवाल उठा रहे हैं। क्षेत्रवासी नरेश चौहान, राजपाल तोमर, सरदार सिंह, रमेश चौहान, भाव सिंह तोमर का कहना है कि वायरक्रेट झील की सुरक्षा दीवार है। चार या पांच महीने में ही वायरक्रेट या सुरक्षा दीवार का धंसना गंभीर विषय है। बताते चलें कि कंक्रीट से बनाए गए वायरक्रेट में तकनीकी कमी यह भी रहती है कि उन्हें दोबारा से जोड़ा या मरम्मत नहीं की जा सकती है। ऐसे में उसे दोबारा से बनाने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है।
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ग्रामीणों का कहना है कि यदि झील के दूसरे किनारे पर इस प्रकार की स्थिति पैदा होती है तो दिल्ली-यमुनोत्री हाईवे के धंसने का खतरा पैदा हो सकता है। उनका कहना है कि वायरक्रेट के निर्माण की जांच होनी चाहिए। उधर, व्यासी परियोजना के अधिशासी निदेशक राजीव अग्रवाल का कहना है कि वायरक्रेट धंसना एक सामान्य प्रक्रिया है। इसकी निगरानी की जा रही है।