उत्तरकाशी सिलक्यारा सुरंग में डी-वाटरिंग शुरू करने के लिए कवायद जारी है। शनिवार को दोपहर बाद इंजीनियर व श्रमिक ऑगर मशीन से डाले गए 800 एमएम के पाइपों से फिर सुरंग के अंदर गए। जिसके बाद पाइप से उन तक रेत से भरे 50 कट्टे भेजे गए। अधिकारियों का कहना है कि ये कट्टे दूसरी तरफ से मलबे के ऊपर लगाए जाएंगे। जिससे भूस्खलन के दौरान आए मलबे से मिट्टी गिरने का खतरा न रहे।
Silkyara Tunnel: पाइप से अंदर भेजे गए रेत से भरे 50 कट्टे...बिहार से अब काम पर लौटे वीरेंद्र ने कही मन की बात
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उत्तरकाशी सिलक्यारा सुरंग निर्माण को अनुमति मिलने के बाद सुरंग में फंसे रहे मजदूर भी धीरे-धीरे काम पर लौट रहे हैं। वापस लौटने वालों में बिहार के बांका जिले के वीरेंद्र किसकू भी शामिल हैं। वीरेंद्र ने बताया कि वह गांव में अधूरा मकान पूरा बनवाकर आया है। हालांकि उसके परिजनों ने उसे यहां आने से रोका था। लेकिन वह उन्हें समझा-बुझाकर वापस काम पर लौट आया।
41 वर्षीय वीरेंद्र किसकू ने बताया कि जब हादसा हुआ तो वह अपने साथियों के साथ सिलक्यारा वाले मुहाने से करीब 2300 मीटर अंदर काम कर रहा था। जेसीबी मशीन ऑपरेटर किसकू ने बताया कि हादसे के बाद मलबा गिरने की आवाज इतनी तेज थी कि उन्हें अंदर सुनाई दी थी। उनके साथियों ने वायरलेस से उन्हें सुरंग धंसने की सूचना दी।
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वीरेंद्र किसकू ने बताया कि उसे कंपनी से 2 लाख और राज्य के सीएम पुष्कर सिंह धामी की ओर से एक लाख रूपए की मदद मिली थी। गांव में अधूरे मकान को पूरा करवाने में उनका 5 लाख रूपए खर्च हुआ। कुछ पैसे की उन्होंने एफडी करवाई है।