500 साल पुराने इस भवन को डिगा नहीं पाए कई भूकंप, बनेगा पर्यटन केंद्र
तीन-तीन भूकंप के झटकों को सहन कर चुके उत्तरकाशी के रैथल गांव में स्थित 500 साल पुराने पंचपुरा भवन को अब टूरिस्ट सेंटर के रूप में विकसित किया जाएगा।
500 साल पुराने इस भवन को डिगा नहीं पाए कई भूकंप, बनेगा पर्यटन केंद्र
खास बात यह है कि यह सरकारी स्तर पर नहीं बल्कि नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम) और स्वयंसेवकों की संस्था ग्रीन पीपुल से जुडे़ लोग इस काम को अपने स्तर से अंजाम देंगे। निम से जुड़ीं ममता रावत के अनुसार स्थानीय महिलाएं को भी इसमें जोड़ा जाएगा।
500 साल पुराने इस भवन को डिगा नहीं पाए कई भूकंप, बनेगा पर्यटन केंद्र
पंचपुरा भवन को राज्य आपदा प्रबंधन एवं न्यूनीकरण केंद्र ने भी स्थानीय कला का बेहतरीन नमूना माना है। निम के सूत्रों के मुताबिक पंचपुरा भवन को रिस्टोर करने में दिल्ली की आर्किटेक्ट अल्का सूद का सहयोग लिया जा रहा है।
500 साल पुराने इस भवन को डिगा नहीं पाए कई भूकंप, बनेगा पर्यटन केंद्र
बताया जा रहा है कि अल्का इस काम में निशुल्क योगदान देंगी। भूगर्भ विज्ञानी नवीन जुयाल ने इस भवन की कार्बन डेटिंग की थी। जुयाल ने पाया कि यह भवन 500 साल से भी पुराना है। पांच मंजिला यह भवन उत्तरकाशी क्षेत्र में अब तक आए तीन बड़े भूकंपों को झेल चुका है।
500 साल पुराने इस भवन को डिगा नहीं पाए कई भूकंप, बनेगा पर्यटन केंद्र
केदारनाथ पुनर्निर्माण में जुटे कर्नल अजय कोठियाल की टीम अब पंचपुरा के बहाने रैथल गांव की तस्वीर को बदलने की कोशिश में है। टीम से जुड़े प्रभात कुमार सिंह के मुताबिक रैथल गांव में जैविक खेती और स्थानीय स्तर पर फार्मिंग की तैयारी है।