उत्तराखंड के कुमाऊं में कुछ समय बारिश के चलते जंगलों की आग शांत होने के बाद दोबारा जंगल आग की भेंट चढ़ने लगे हैं। मंगलवार रात पाटी के प्याली, धूरा, गूम के जंगलों में भीषण आग लग गई।
वन विभाग को आग लगने की सूचना देने के बावजूद वन कर्मियों के न पहुंचने पर ग्रामीणों ने गहरी नाराजगी जताई है। जंगल में आग लगने से करीब डेढ़ हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में वन संपदा को नुकसान पहुंचा है।
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मंगलवार की रात को इन गांवों के जंगलों में आग भड़क गई। हवा के साथ तेजी के साथ आग ने जंगल को अपनी चपेट में ले लिया। आग लगने से छोटे, बड़े पेड़ पौधों के अलावा वन संपदा को काफी नुकसान पहुंचा है।
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ग्राम प्रधान हेम शर्मा और सरपंच नरेश भट्ट ने बताया कि आग इतनी भयंकर थी कि मनरेगा से ग्राम पंचायत में लगाए गए सहतूत, बांज, केकड़ के 400 पौधे आग की चपेट में आ गए। प्रधान ने बताया कि ग्रामीणों ने बड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू किया।
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उत्तराखंड के जंगल में आग
- फोटो : अमर उजाला
पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय से करीब 14 किमी दूर पलेटा मल्लाखूना के जंगलों में दो दिनों से आग लगी हुई। शाम के समय तेज हवा के चलने के कारण आग और अधिक विकराल होती जा रही है। थल क्षेत्र में बीते दिनों हुई बारिश से जंगलों की आग पूरी तरह बुझ गई थी मंगलवार शाम सात बजे फिर क्षेत्र के तीन जंगलों में भीषण आग लग गई।
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उत्तराखंड के जंगल में आग
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वन पंचायत दड़मोली, लेजम ग्राम पंचायत के तोक वन पंचायत कमद तथा वन विभाग के कालीनाग के जंगल में शाम से ही आग लगी और रात होते ही आग ने विकराल रूप ले लिया जिससे पूरी रात तीनों जंगल धू धू कर जलते रहे। वन पंचायत समिति और वन विभाग के कर्मचारी आग बुझाने नहीं पहुंचे। वनाग्नि से जहां तीनों जंगलों की वन संपदा खाक हो गई है।
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उत्तराखंड के जंगलों में आग
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बागेश्वर जिला मुख्यालय के समीपवर्ती गांव अड़ौली में जंगल की आग आबादी तक पहुंच गई। ग्रामीणों की सजगता से गांव तक पहुंचने से पहले ही आग पर काबू पा लिया गया। कपकोट तहसील के कई जंगल भी आग से धधक रहे हैं।
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मंगलवार देर रात करीब नौ बजे अड़ौली गांव के पास जंगल में लगी तेजी से गांव की तरफ बढ़ने लगी। गांव के पूर्व प्रधान राजेश टम्टा ने आग को आबादी की तरफ आता देखकर सरपंच संगठन के अध्यक्ष पूरन रावल को सूचित किया। रावल गांव के लोगों को साथ लेकर गए।