उत्तराखंड के शपथ ने 13वीं इंटरनेशनल ग्रांड प्रिक्स चैंपियनशिप में शॉर्ट गन डबल ट्रैप में दो वर्गों में गोल्ड जीतकर भारत का नाम रोशन किया है। पहला गोल्ड व्यक्तिगत जबकि दूसरा गोल्ड टीम इवेंट में हासिल किया। यह प्रतियोगिता इटली के पॉरपीटों में हुई थी। इस प्रतियोगिता में टीम इंडिया की ओर से भाग लेने वाले शपथ सबसे कम उम्र के शूटर थे।
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- फोटो : AmarUjala
कक्षा नौ में पढ़ने वाले शपथ ने अमर उजाला से हुई बातचीत में बताया कि उनकी इस कामयाबी के पीछे उनके पिता एस राजू के अलावा कोच और मशहूर निशानेबाज योगेंद्र पाल सिंह ‘योगी’ का बहुत बड़ा योगदान है। ग्रेट ब्रिटेन के नामी शूटर माइकल डायमंड को रोल मॉडल मानने वाले शपथ का इरादा अगले ओलंपिक में भारत की ओर से ओलंपिक में गोल्ड हासिल करना है।
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शूटिंग को लेकर झुकाव के बारे में शपथ ने बताया कि बड़े भाई श्रेय भरद्वाज शूटिंग खिलाड़ी रहे हैं, उनके साथ बचपन में प्रैक्टिस करने जाता था। तभी से इस खेल को लेकर लगाव हो गया जो उम्र बढ़ने के साथ जुनून में बदल गया। 11 साल के बेटे के जुनून को देखते हुए पिता एस राजू ने अक्टूबर 2014 से उन्हें योगेंद्र पाल सिंह की देख-रेख में दे दिया।
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उनकी कोचिंग में शपथ का खेल दिन पर दिन निखरता गया। एक साल के भीतर शपथ ने 12 साल की उम्र में उत्तराखंड में हुई डबल ट्रैप चैंपियनशिप में सबसे कम उम्र का चैंपियन बनकर अपनी प्रतिभा का परिचय दे दिया था। यही वजह रही कि भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) ने उसे शीर्ष 12 निशानेबाजों की टीम में उसे शामिल कर लिया। मालूम हो कि 12 में सर्वश्रेष्ठ तीन को भारतीय टीम में जगह मिलती है।
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पिछले साल हुए चयन में जहां उसका स्थान 8 वां था, वहीं इस बार शपथ पांचवें नंबर पर रहा है। उत्तराखंड स्टेट राइफल एसोसिएशन के एस राणा का कहना है कि शपथ की प्रतिभा देखते हुए उन्हें पक्का यकीन है कि भारत के लिए यह खिलाड़ी कई गोल्ड जीतेगा।