कमरतोड़ महंगाई और पेट्रोलियम पदार्थों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। इसके बाद भी हाड़तोड़ मेहनत करके फसलें उगाने वाला किसान परेशान है। मंडी में पहुंचकर किसानों को उसकी सब्जी का सही दाम नहीं मिल पा रहा है। किसानों को मुनाफा तो दूर खाद, बीज और मंडी लाने का भाड़ा तक नहीं निकल रहा है। हताश किसान मंडी में ही सब्जियां फेंकने को मजबूर हैं। जबकि कई किसानों ने मंडी के बजाय ट्रैक्टर ट्राली में सब्जियां लादकर फेरी लगाना शुरू कर दिया है। वहीं भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत के आह्वान पर और उपज का पूरा मूल्य नहीं मिलने से दुखी जसपुर के किसान ने अपने खेत में खड़ी गोभी की फसल पर ट्रैक्टर चला दिया। फरवरी में लोकल सब्जियों की खूब आवक होती है। शादियों का सीजन नहीं है। इसलिए भी बाजार में सब्जियों की खपत कम है। आवक अधिक और खपत कम होने का असर काश्तकारों पर पड़ रहा है। काश्तकारों को कई सब्जियों के वाजिब दाम तक नहीं मिल रहे हैं। मंडी में बिचौलिये मनमाने दामों में खरीद रहे हैं। लागत तक नहीं निकलने से टमाटर, बैगन, धनिया, पालक, फूल और पत्ता गोभी को मंडी में ही फेंक रहे हैं। ज्वालापुर स्थित मंडी से किसानों की फेंकी सब्जियों को कई पशुपालक बटोरकर मवेशियों के लिए ले जा रहे हैं।
किसानों को नहीं मिले सब्जियों के वाजिब दाम, कहीं मंडी में फेंकी सब्जी तो किसी ने खड़ी फसल पर चलाया ट्रैक्टर, तस्वीरें
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गढ़मीरपुर निवासी काश्तकार किशन पाल ने बताया कि डीजल और पेट्रोल के दामों बढ़ने से भाड़ा भी बढ़ गया है। किसान को उसकी उपज का सही दाम नहीं मिल रहा है। धनौरी के काश्तकार जगदीप सिंह ट्रैक्टर ट्राली में आलू बेचते हुए दिखे। उन्होंने बताया कि 40 किलो का कट्टा 250 रुपये बेचना पड़ रहा है। जबकि मंडी में 4 रुपये किलो के खरीदार नहीं है। आलू फुटकर बाजार में दस रुपये किलो बिक रहा है। मंडी में भाव नहीं मिलने से खुले बाजार में आलू बेचने को मजबूर हैं। जगदीप सिंह बताते हैं उसकी तरह गांव के कई काश्तकार मंडी के बाजाए बाजार में आलू-मटर और अन्य सब्जियां बेच रहे हैं।
सब्जी के दामों में अचानक से गिरावट आई है। ठेले वाले गोभी दो से तीन रुपये किलो भी उठाने के लिए तैयार नहीं है। फुटकर के व्यापारी पालक, मटर समेत सभी सब्जी को कम दामों पर भी नहीं उठा रहे हैं।
- मानी, आढ़ती ज्वालापुर मंडी
पेट्रोल व डीजल के दामों के बढ़ने से लागत भी नहीं निकल पा रही है। खाद से लेकर कीटनाशक दवाईयां तक महंगी हो गई है। ऐसे में सब्जी को वापस ले जाकर डबल किराया देना पड़ता है। इसलिए सब्जी को मंडी में ही छोड़कर चले जाते हैं।
- किशनपाल किसान, गढ़मीरपुर
इधर, जसपुर में भाकियू के जिला अध्यक्ष ने किसानों से आवेश में आकर अपनी फसलों को नष्ट न करने की अपील की है। बुधवार को जसपुर के ग्राम पतरामपुर निवासी ओंकार सिंह ने अपने चार बीघा खेत में खड़ी गोभी की फसल को ट्रैक्टर चलाकर नष्ट कर दिया। सूचना पर क्षेत्र के किसानों ने खेत पर पहुंचकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री के खिलाफ नारेबाजी की।
ओंकार सिंह ने कहा कि एमएसपी लागू ना होने के कारण गोभी बाजार में एक से दो रुपये प्रति किलो बिक रही है, जबकि इसे बाजार में ले जाने का खर्च तीन से चार रुपये प्रति किलो आ रहा है। उधर, भाकियू के जिलाध्यक्ष प्रेम सिंह सहोता ने कहा कि जिले के किसान सरकारों पर अन्य लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करके दबाव बनाएं। अपनी फसलों को नष्ट नहीं करें। वहां पर सुखबीर सिंह ढिल्लो, सुखबीर सिंह भुल्लर, गुरमीत सिंह, अवतार सिंह, मोहम्मद आरिफ, नईम प्रधान, बलजीत सिंह, रंजीत सिंह आदि थे।