उत्तराखंड के चमोली जिले में आपदा प्रभावित घाट क्षेत्र में ग्रामीणों को आपदा के 18 दिनों बाद भी दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है। आम रास्तों के साथ ही कई लोगों के घरों में अभी भी मलबा भरा हुआ है। जिन लोगों के घर क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें ठहरने और खाने-पीने की समस्या बनी हुई है। प्रभावित परिवारों ने जिला प्रशासन से पुनर्वास की मांग उठाई।
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बता दें कि बीते चार मई को घाट बाजार के शीर्ष भाग में बादल फटने से कई घरों में मलबा घुस गया था, जबकि दस से अधिक मकानों को नुकसान हुआ था। पैदल रास्ते भी मलबे में दब गए थे।
आपदा के तत्काल बाद प्रशासन ने तेजी दिखाते हुए बाजार क्षेत्र से मलबा हटाने का काम शुरू किया और प्रभावित परिवारों को विद्यालय भवन में शरण दी, उनके खाने-पीने की व्यवस्था भी की गई, लेकिन जैसे-जैसे दिन गुजरते गए, प्रशासन ने प्रभावितों को उनके हाल पर छोड़ दिया है। आपदा में राय सिंह, बाग सिंह, भगवान सिंह, बिंदेश्वरी देवी, नरेंद्र सिंह, पुष्पा देवी, पार्वती देवी, गोविंद सिंह, गौरी देवी और संग्राम सिंह के घर क्षतिग्रस्त हो गए थे।
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घाट क्षेत्र में फैला मलबा
- फोटो : अमर उजाला
प्रभावितों का कहना है कि बारिश होते ही भूस्खलन का डर सताने लगता है। अब यहां रहना खतरे से खाली नहीं है। उन्होंने शासन-प्रशासन से जल्द प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की मांग की।
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घाट क्षेत्र में फैला मलबा
- फोटो : अमर उजाला
तहसीलदार राकेश देवली का कहना है कि घाट बाजार के ऊपरी क्षेत्र में घरों और आम रास्तों से मलबा हटाने के लिए छह मजदूर लगाए गए हैं। प्रभावितों को विद्यालय भवन रहने के लिए दिया गया है, साथ ही खाने की व्यवस्था भी की गई है। प्रभावित परिवार पुनर्वास की मांग उठा रहे हैं। उनकी मांग को प्रशासन के सम्मुख रखा जाएगा।
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घाट क्षेत्र में फैला मलबा
- फोटो : अमर उजाला
उत्तराखंड के चमोली जिले में गोपेश्वर में घाट बाजार कई आपदाओं का दंश झेल चुका है। आपदा के लिहाज से घाट बाजार महफूज नहीं है। चारों ओर से पहाड़ियों से घिरे घाट बाजार के बीचोंबीच से चुफलागाड नदी बहती है। इस नदी के उफान पर आने से भी कई लोग अकाल मौत का शिकार हुए हैं।
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घाट क्षेत्र में फैला मलबा
- फोटो : अमर उजाला
घाट बाजार चुफलागाड नदी के दोनों ओर से बसा हुआ है। यहां नदी तीव्र ढलान में बहती है, जिससे अतिवृष्टि होने पर नदी रौद्र रुप में बहती है। नदी के दोनों ओर बाढ़ सुरक्षा कार्य भी नहीं हुए हैं।