फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

शहीद चंद्रशेखर: 38 साल बाद भी बर्फ से सुरक्षित मिला पार्थिव शरीर, हाथ में बंधे ब्रेसलेट से हुई पहचान

Mon, 15 Aug 2022 10:52 AM IST
अलका त्यागी संवाद न्यूज एजेंसी, हल्द्वानी
संवाद न्यूज एजेंसी, हल्द्वानी Published by: अलका त्यागी Updated Mon, 15 Aug 2022 10:52 AM IST
विज्ञापन
Uttarakhand Martyr Chandra shekhar dead body found Safely even after 38 years from snow
शहीद लांसनायक चंद्रशेखर हर्बोला का परिवार - फोटो : अमर उजाला

उत्तराखंड निवासी 19 कुमाऊं रेजीमेंट के लांसनायक चंद्रशेखर हर्बोला का पार्थिव शरीर 38 साल बाद भी सुरक्षित है। परिजनों ने बताया कि अभी तक उन्हें जो जानकारी मिली है उसके अनुसार शहीद की पार्थिव देह अब भी सुरक्षित अवस्था में है। सियाचिन में बर्फ में दबे रहने की वजह से शहीद की पार्थिव देह को नुकसान नहीं हुआ है। 



38 साल बाद: सियाचिन में मिला लांसनायक चंद्रशेखर का पार्थिव शरीर, ग्लेशियर की चपेट में आने से हुए थे शहीद

शहीद चंद्रशेखर का जब शव मिला तो उनकी पहचान के लिए उनके हाथ में बंधे ब्रेसलेट का सहारा लिया गया। इसमें उनका बैच नंबर और अन्य जरूरी जानकारी दर्ज थीं। बैच नंबर से सैनिक के बारे में पूरी जानकारी मिल जाती है। इसके बाद उनके परिजनों को सूचना दी गई। 

शहीद चंद्रशेखर: पथराई आंखों से 38 साल किया पति का इंतजार, पत्नी बोली- विश्वास था अंतिम दर्शन जरूर करूंगी

भारत-पाकिस्तान की झड़प के दौरान मई 1984 में सियाचिन में पेट्रोलिंग के लिए 20 सैनिकों की टुकड़ी भेजी गई थी। इसमें लांसनायक चंद्रशेखर हर्बोला भी शामिल थे। सभी सैनिक सियाचिन में ग्लेशियर टूटने की वजह से इसकी चपेट में आ गए थे। जिसके बाद किसी भी सैनिक के बचने की उम्मीद नहीं थी। भारत सरकार और सेना की ओर से सैनिकों को ढूंढने के लिए सर्च ऑपरेशन चलाया गया। इसमें 15 सैनिकों के शव मिल गए थे लेकिन पांच सैनिकों का पता नहीं चल सका था।

Uttarakhand Martyr Chandra shekhar dead body found Safely even after 38 years from snow
शहीद लांसनायक चंद्रशेखर हर्बोला - फोटो : अमर उजाला

बता दें कि सियाचिन दुनिया के दुर्गम सैन्य स्थलों में से एक है। यह बहुत ऊंचाई पर स्थित है, जहां जीवित रहना एक सामान्य मनुष्य के बस की बात नहीं है। भारत के सैनिक आज भी वहां पर अपनी ड्यूटी निभाते हैं। 1984 में देश के सैनिकों ने इस जगह को पूरी तरह से अपने नियंत्रण में लिया था। इस अभियान में कई सैनिकों ने अपनी शहादत दी थी।

Uttarakhand Martyr Chandra shekhar dead body found Safely even after 38 years from snow
शहीद लांसनायक चंद्रशेखर हर्बोला का परिवार - फोटो : अमर उजाला

सेना से सेवानिवृत्त अधिकारियों ने बताया कि भारत और पाकिस्तान के मध्य साल 1972 में हुए शिमला समझौते के बावजूद सियाचिन का मसला नहीं सुलझा था। पाकिस्तान इस क्षेत्र पर कब्जा जमाना चाहता था। इसलिए पाकिस्तान ने अपनी तरफ से पर्वतारोहियों को सियाचिन में चढ़ने की इजाजत दी थी। ताकि भविष्य में भी इस मुद्दे पर भारत से विवाद हो तो वह इस पर अपना दावा कर सके।

विज्ञापन
विज्ञापन
Uttarakhand Martyr Chandra shekhar dead body found Safely even after 38 years from snow
शहीद लांसनायक चंद्रशेखर हर्बोला - फोटो : अमर उजाला

इसके साथ ही भारत को सूचना मिली कि पाकिस्तान इस क्षेत्र को सैन्य कार्रवाई के तहत हथियाना चाहता है। इसलिए भारत ने 13 अप्रैल 1984 में ऑपरेशन मेघदूत की शुरूआत की थी। भारत को सूचना मिली थी कि पाकिस्तान 17 अप्रैल को ग्लेशियर पर कब्जा करने की योजना बना रहा है।

विज्ञापन
Uttarakhand Martyr Chandra shekhar dead body found Safely even after 38 years from snow
शहीद चंद्रशेखर की पत्नी - फोटो : अमर उजाला

इससे पहले ही भारत ने पूरे ग्लेशियर पर कब्जा कर लिया। 1971 की जंग के बाद पाकिस्तान की ये एक और बड़ी हार थी। इस क्षेत्र की अहमियत इस बात से समझी जा सकती है कि अगर पाकिस्तान का इस पर कब्जा हो जाता तो उसकी सीमा अस्काई चीन से मिल जाती, जो भारत के लिए बहुत बड़ा खतरा होती।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed