तीन दिन पहले लापता हुए तीन बच्चों की तलाश में जुटे परिवारों की आखिरी उम्मीद भी तब टूट गई जब सोमवार को तीनों के शव पौड़ी हाईवे के पास टूट गदेरे में बरामद हुए। तीन दिन से वे हर पल बच्चों के सही सलामत होने की प्रार्थना कर रहे थे। सोमवार सुबह गदेरे में तीन शव मिलने की सूचना मिलते ही वे घटनास्थल की ओर दौड़ पडे़। बच्चों का चेहरा देखते वहां चीख पुकार मच गई। आर्यन और रौनक परिवार के इकलौते बेटे थे।
लापता किशोरों के मिले शव: सिद्धबली जाने के लिए दो दिन पहले घर से निकले तीनों, खोह नदी में मिली तीसरे दिन लाशें
गोविंद नगर निवासी वीरेंद्र ने बताया कि उनका बेटा आर्यन (16) पुत्र वीरेंद्र और पड़ोस में रहने वाले उसके दो साथी नमो (13) पुत्र संजीव कुमार और रौनक (13) पुत्र कृष्ण अच्छे दोस्त थे। तीनों स्कूल की पढ़ाई के बाद ज्यादातर समय साथ में खेलते थे।
आर्यन नौवीं, रौनक छठी और नमो सातवीं कक्षा में पढ़ता था। तीनों अक्सर सुबह घूमने के लिए सिद्धबली की ओर जाते थे और कभी-कभी स्कूटी भी ले जाते थे। तीनों एक घंटे में ही लौटकर आ जाते थे। शुक्रवार सुबह वे तीन घंटे बाद भी नहीं लौटे तो परिजन चिंतित हो गए।
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गेदेरे में मिले किशोरों के शव
- फोटो : अमर उजाला
बच्चों की तलाश में दोपहर से शाम हो गई लेकिन उनका पता नहीं चला। इसके बाद पुलिस को बच्चों के लापता होने की सूचना दी गई। बच्चों की चिंता में तीनों घरों में शुक्रवार से चूल्हा नहीं जला था। सोमवार सुबह तीनों के शव मिलने के बाद गोविंद नगर मातम में डूब गया। क्षत विक्षत होने के कारण शव को घर नहीं ले जाया गया। परिजनों को गाड़ीघाट स्थित पोस्टमार्टम हाउस में ही अंतिम दर्शन के लिए बुलाया गया। बच्चों के चेहरे देख वहां चीखपुकार मच गई।
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घटनास्थल से मिली स्कूटी
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गोविंदनगर की पार्षद कविता मित्तल, संजय मित्तल, प्रवेश रावत और अरविंद वर्मा ने बताया कि बच्चों के शव मिलने की सूचना से पूरे इलाके में मातम पसर गया। परिजन घटना को संदिग्ध मानकर चल रहे हैं। लोगों ने भी मामले में गहराई से जांच की मांग की है।
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बच्चों की मौत के बाद विलाप करते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
वहीं, तीनों किशोरों के परिजनों ने हत्या की आशंका जताई है। उनका कहना है कि तीनों किशोरों के सिर पर चोट है। पुलिया से गदेरे में गिरने के बाद भी स्कूटी का सलामत रहना और नंबर प्लेट पर कपड़ा बंधा होना आशंका पैदा कर रहा है। परिजन शनिवार को हत्या का मुकदमा दर्ज कराएंगे।
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बच्चों की मौत के बाद विलाप करते परिजन
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आर्यन के पिता वीरेंद्र ने बताया कि कि उनका बेटा काशीरामपुर तल्ला के एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ता था। कुछ दिन पूर्व लकड़ी पड़ाव के कुछ युवकों ने उनके बेटे के साथ मारपीट की थी। तब स्कूल के प्रधानाचार्य ने आर्यन को किशोरों के इरादे ठीक नहीं होने की बात कहते हुए उनसे न उलझने की सलाह दी थी।