चमोली आपदा में लापता हुए जौनसार के पंजिया गांव निवासी संदीप चौहान पुत्र जवाहर सिंह, जीवन सिंह चौहान पुत्र जवाहर सिंह, हर्ष चौहान पुत्र पूरण सिंह और कल्याण सिंह चौहान पुत्र कल सिंह का अब भी कुछ पता नहीं चल सका है। जबकि विक्रम सिंह पुत्र नारायण सिंह निवासी पाटा और जगदीश पुत्र स्वर्गीय धूम सिंह भी आपदा में लापता हो गए थे।
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तपोवन सुरंग के अंदर के हालात
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अनिल पुत्र थेफा व अनिल पुत्र भगतू निवासी ददोली और सलदार सिंह पुत्र जूईया निवासी फटेऊ के शव बरामद हो चुके हैं। लापता पंजिया निवासी कल्याण सिंह के परिवार में पत्नी और दो माह का बच्चा है, जबकि संदीप चौहान की एक मई को शादी होनी थी। विक्रम निवासी पाटा की पत्नी और दो बच्चे हैं। जिनका सहारा मात्र विक्रम था। सास ससुर भी बूढ़े हैं। लापता लोगों के परिजन अपनों की आस अब खो चुके हैं। उनके आंखों के आंसू भी अब सूख चुके हैं।
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तपोवन सुरंग
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वहीं एनटीपीसी लिमिटेड ने सात फरवरी को उत्तराखंड प्राकृतिक आपदा में जान गंवाने वाले श्रमिकों के परिवारों को मुआवजा जारी करना शुरू कर दिया है। तपोवन विहार निवासी मृतक नरेंद्र की पत्नी विमला देवी को 20 लाख रुपये का पहला चेक सौंपा गया। तपोवन परियोजना के प्रमुख आरपी अहिरवार के नेतृत्व में एनटीपीसी की एक टीम ने उनके घर जाकर संवेदना प्रकट की।
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तपोवन सुरंग से निकाला जा रहा पानी
- फोटो : ANI
डीजीपी अशोक कुमार ने कहा कि चमोली के तपोवन में लगातार राहत और बचाव कार्य जारी रहेगा। आखिरी दम तक हम वहां जुटे रहेंगे। रैणी में मलबा तीन चार दिन में साफ कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अभी तक 58 शव मिल चुके हैं। बुधवार को 11वें दिन भी सुरंग में मलबा हटाने का कार्य जारी रहा। लेकिन बार-बार पानी का रिसाव बाधा बनता रहा।
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तपोवन सुरंग के बाहर खड़ी मशीन
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आपदा प्रभावित सीमांत नीती घाटी के सभी 13 गांवों में बिजली और पेयजल व्यवस्था सुचारु हो गई है। लाता, रैणी, जुग्जु, सुरांईथोटा, भलगांव आदि गांवों में बिजली और पानी की सप्लाई सुचारु हो गई है। जिला सूचना अधिकारी रविंद्र नेगी ने बताया कि प्रभावित परिवारों में अब तक 529 राशन किट बांटे जा चुके हैं, जबकि स्वास्थ्य शिविर लगाकर 1580 लोगों का उपचार किया जा चुका है।