अवैज्ञानिक तरीके से पहाड़ियों को काटने से संतुलन गड़बड़ा रहा है। इससे गंभीर भूस्खलन और भारी बाढ़ आ रही है। यह कहना है भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग के सेवानिवृत्त अपर महानिदेशक त्रिभुवन सिंह पांगती का। संवाद न्यूज एजेंसी से हुई बातचीत में उन्होंने प्राकृतिक आपदाओं पर गहरी चिंता जताई और एक उच्च समिति बनाने की सिफारिश की जो प्रदेश में सुनियोजित विकास का वास्तविक आकलन कर सके।
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तपोवन में बैराज साइट पर शवों को ढूंढती टीम
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चमोली के ऋषिगंगा में बाढ़ के कारण तबाह हुई बिजली परियोजना की शुरुआत में दो वर्षों तक काम कर चुके पूर्व अपर निदेशक त्रिभुवन का कहना है कि विकास के लिए हिमालय की संवेदनशीलता को नजरअंदाज करना घातक होगा। उन्होंने कहा कि बिजली परियोजनाओं का निर्माण कर रही निजी कंपनियों को पहाड़ी इलाके के भूभाग की स्थिति से संबंधित जानकारी नहीं है।
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नदी में मलबा
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सभी परियोजनाएं उत्तराखंड राज्य में पूरी तरह से विफल हो रही हैं। इसकी गंभीरता को देखते हुए किसी सरकारी विभाग या हिमालयन क्षेत्रों में कार्य करने की विशेषज्ञता प्राप्त अन्य तकनीकी एजेंसियों से भूगर्भीय, जिओ हेजर्ड (जोखिम, ग्लेशियोलॉजिकल और भूभाग का विस्तृत अध्ययन कराना जरूरी है।
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सुरंग के अंदर रास्ता बनाते जवान
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हिमालयी क्षेत्रों के सभी बुनियादी ढांचे और संचार परियोजनाओं के लिए सभी तकनीकी समीक्षा और सलाह प्रदान के लिए प्रख्यात विशेषज्ञों की एक उच्च स्तरीय समिति स्थापित करने की जरूरत है, जो हिमालयी क्षेत्रों की सभी परियोजनाओं के सुनियोजित विकास का वास्तविक आकलन कर सके।
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इसी जगह पर था ऋषि गंगा पावर प्रोजेक्ट
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पिछले दिनों चमोली में नीती घाटी में आई आपदा पर वाडिया इंस्टीट्यूट समेत कई संस्थानों के वैज्ञानिकों की संयुक्त टीमें मंथन करेंगी। इसके बाद इस तरह की आपदा से निपटने के लिए जरूरी कवायद की जाएगी। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने देश के तमाम संस्थानों के वैज्ञानिकों के साथ बैठक कर आपदा से जुड़े तमाम पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने वैज्ञानिकों की दो संयुक्त टीमें गठित की हैं। ये टीमें 60 दिनों में रिपोर्ट सौंपेंगी।