जंगल की आग के मामले में अप्रैल का पहला सप्ताह ही भारी साबित हो रहा है। पिछले 24 घंटे में ही वनाग्नि के प्रदेश भर में 85 मामले सामने आए और करीब 165 हेक्टेयर जंगल जल गया। पिछले कुछ दिनों से हर दिन करीब 65 हेक्टेयर तक का जंगल ही प्रभावित हो रहा था।
सोमवार को वनाग्नि बुझाने को हेलीकॉप्टर ने भी उड़ान भरी, लेकिन एक जगह की आग पर काबू पाने से पहले ही वन विभाग को दूसरी जगह से अलर्ट मिल जा रहा है। देर शाम वन विभाग की ओर से जारी फायर बुलेटिन के मुताबिक आरक्षित वन क्षेत्र में आग के 47 मामले सामने आए। इससे 69.1 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ।
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वहीं, वन मंत्री डा. हरक सिंह रावत श्रीनगर के समीप धोबीघाट के जंगल में लगी आग को बुझाने के लिए कूद पड़े। लगभग एक घंटे तक मंत्री ने वन विभाग और पुलिस के साथ पौड़ी-श्रीनगर राजमार्ग के किनारे आग बुझाई। इस दौरान आग बुझाते समय एक वन वीट अधिकारी अनीता कुंवर चोटिल हो गई। उन्हें तत्काल बेस अस्पताल उपचार के लिए भेजा गया। सोमवार शाम रुद्रप्रयाग में बैठक लेने के बाद वन मंत्री डा. रावत लैंसडौन जा रहे थे।
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जंगल में आग बुझाते वन मंत्री
- फोटो : अमर उजाला
श्रीनगर के समीप धोबीघाट के जंगलों में आग देखते ही उन्होंने कार रुकवा दी। इसके बाद वह झाड़ी तोड़कर आग बुझाने लगे। उन्हें आग बुझाते देख उनकी फ्लीट में शामिल अधिकारी भी आग बुझाने लगे। मंत्री ने यहां लगभग एक घंटे तक आग बुझाई। समाचार लिखे जाने तक वन विभाग की टीम आग पर काबू पाने का प्रयास कर रही थी। वहीं सड़क से सटे क्षेत्र में फायर बिग्रेड ने आग बुझाई।
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जंगल में आग बुझाने के दौरान चोटिल वनकर्मी
- फोटो : अमर उजाला
वहीं धोबीघाट में आग बुझाते वक्त एक वन वीट अधिकारी अनीता कुंवर चोटिल हो गई। जब वन मंत्री डा. हरक सिंह रावत सड़क किनारे आग बुझा रहे थे। अनीता उनसे कुछ दूरी पर ही आग बुझा रही थी। इसी दौरान वह फिसल गई। जिससे उनके सिर पर चोट लग गई। उन्हें तत्काल बेस अस्पताल उपचार के लिए भेजा गया। डा. रावत ने कहा कि आग लगने की जितनी भी घटना होती है, उतने मुकदमे दर्ज किए जाएंगे। आग लगाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। इसमें ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी।
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जंगल में आग बुझाते वनकर्मी
- फोटो : अमर उजाला
बता दें कि वन पंचायतों में वनाग्नि के मामले कम आए, लेकिन अधिक क्षेत्र को नुकसान हुआ। कुल 38 मामलों में 96.35 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ। यह आरक्षित वन क्षेत्र से अधिक है। कुल मिलाकर पिछले 24 घंटे में ही 165 हेक्टेेयर जंगल खाक हो गया।
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जंगल में आग
- फोटो : अमर उजाला
जंगल की आग वैसे मई और जून में भड़कती है। शुष्क मौसम का ही प्रकोप है कि जंगल की आग ने अप्रैल में ही प्रकोप दिखाना शुुरू कर दिया है। एक अप्रैल से लेकर पांच अप्रैल तक ही कुल 261 मामले सामने आए और 413 हेक्टेयर जंगल खाक हो गया। वन विभाग ने 8.37 लाख रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया है। राहत इतनी है कि मानव और वन्यजीवों को नुकसान का मामला सामने नहीं आया है।