हरिद्वार पहुंचे यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रम में कई संत नाराज होकर वापस लौट गए। आगे जानिए...
यूं तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ताजपोशी को संत समाज अपना गौरव बताता रहा है, लेकिन सोमवार को योगी के मंच से ही कई संतों को निराश लौटना पड़ा। इनमें से कुछ संतों ने मंच पर समुचित सम्मान नहीं मिलने की बात कही है। योगगुरु स्वामी रामदेव भी योगी के साथ मंच पर नहीं दिखे। दो दिन पहले से ही यह चर्चा आम थी कि योगी के मंच पर संत समाज के प्रतिनिधि अग्रिम पंक्ति में विराजमान रहेंगे।
सोमवार को रोड़ीबेलवाला में संपन्न हुए यूपी पर्यटन आवास गृह के शिलान्यास समारोह में भाग लेने के लिए भारत साधु समाज और कई अन्य संगठनों से जुड़े संत पहुंचे, लेकिन जब मंच पर जाने लगे तो पाया कि प्रथम पंक्ति में संतों की बजाय राजनेताओं के नाम की पट्टिकाएं लगी थी। संतों के नाम तीसरी और चौथी पंक्ति में बैठने के लिए सुझाए गए थे।
यह देखकर कई संत इसे अपनी गरिमा के अनुरूप नहीं मानते हुए कार्यक्रम से पहले ही लौट गए। इन संतों में प्रमुख रूप से भारत साधु समाज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयराम आश्रम पीठाधीश्वर ब्रह्मस्वरुप ब्रह्मचारी, दिगंबर अखाड़े के बाबा हठयोगी, चेतनज्योति पीठाधीश्वर ऋषिश्वरानंद, विष्णुदेवा नंद आदि शामिल थे।
यही नहीं प्रख्यात योगगुरु रामदेव भी समारोह में भाग लेने पहुंचे। हालांकि पंडाल में प्रवेश लेने से पहले पत्रकार वार्ता में उन्होंने योगी आदित्यनाथ की कार्यप्रणाली की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। इसके बाद शिलान्यास कार्यक्रम में भी शामिल हुए। स्वामी रामदेव के मंच पर नहीं दिखने पर पंडाल में चर्चा होती रही कि प्रथम पंक्ति में बैठने के लिए स्थान नहीं देने से बाबा नाराज होकर चले गए। संतों की यह नाराजगी देर शाम तक चर्चा का विषय बनी रही। बाबा हठयोगी नं तो फेसबुक पर इसे संतों का घोर अपमान बताते हुए पोस्ट भी अपलोड कर दी।