श्रीबदरीनाथ धाम के कपाट बुधवार को अपराह्न तीन बजकर 45 मिनट पर शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। इस दौरान भगवान बदरीविशाल के दर्शनों के लिए करीब 1500 तीर्थयात्री धाम में मौजूद रहे।
हजारों भक्तों की मौजूदगी में शीतकाल के लिए बंद हुए बदरीनाथ धाम के कपाट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मंगलवार को धाम में रावल ईश्वर प्रसाद नंबूदरी ने माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना संपन्न की। बुधवार को भोग के लिए मंदिर के कपाट बंद नहीं हुई। दिल्ली के एक श्रद्धालु ने बदरीनाथ मंदिर को करीब बीस कुंतल गेंदे के फूलों से सजाया है।
कपाट बंद करने से पहले मां लक्ष्मी की सखी के रुप में रावल ने स्त्री वेश धारण कर मां लक्ष्मी की मूर्ति को बदरीनाथ मंदिर के गर्भगृह में रखा। इससे पूर्व गर्भगृह से भगवान उद्धव, कुबेर व गरुड़ की उत्सव मूर्तियों को चांदी की डोली में रखा जाता है।
इस दौरान धृत लेप कंबल को भगवान बदरीनाथ और मां लक्ष्मी को ओड़ाया गया। इसी के साथ कपाट बंद कर दिए गए।
कपाट बंद करने की प्रक्रियाः रात्रि 2.30 बजे---बदरीनाथ जी का अभिषेक और फूलों से श्रृंगार। प्रात: 3.00 बजे--बदरीनाथ जी की पूजाएं शुरु। सुबह 3.15 बजे--आम श्रद्धालुओं द्वारा बदरीनाथ जी के दर्शन। पूर्वाह्न 11.00 बजे--धर्माधिकारी व वेदपाठियों द्वारा स्वस्ति वाचन। दोपहर 02.00-मुख्य पुजारी रावल स्त्री वेश धारण कर मां लक्ष्मी को गर्भगृह में रखा। अपराह्न 03.30- बदरीनाथ जी के कपाट बंद होने की प्रक्रिया शुरु। अपराह्न 3.45 बजे-बदरीनाथ जी के कपाट शीतकाल के लिए बंद।