कभी तहसील कार्यालय के कर्मचारियों को टिफिन पहुंचाने वाली मीनाक्षी शर्मा आज डिप्टी कलेक्टर बन गई हैं। मीनाक्षी बताती हैं कि स्कूल और कॉलेज के दिनों में वह अपनी मां के टिफिन सेवा के काम में हाथ बंटाते हुए तहसील समेत कई सरकारी कार्यालयों में टिफिन पहुंचाती थीं।
उस समय शायद ही किसी ने कल्पना की होगी कि एक दिन वही लड़की प्रशासनिक सेवा में चयनित होकर एसडीएम के पद पर पहुंचेगी और जिन कर्मचारियों को वह टिफिन देती थी, वे उसके अधीन कार्य करेंगे। संघर्ष से सफलता तक का यह सफर आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है।
प्रगति विहार निवासी मीनाक्षी शर्मा ने उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (यूकेपीएससी) की परीक्षा पहले ही प्रयास में उत्तीर्ण कर डिप्टी कलेक्टर बनने का गौरव हासिल किया है। उनकी सफलता के पीछे वर्षों की मेहनत, अनुशासन और पारिवारिक संघर्ष की लंबी कहानी छिपी है।
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मीनाक्षी शर्मा
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मीनाक्षी के पिता के निधन के बाद उनकी मां ने परिवार का पालन-पोषण करने के लिए टिफिन सेवा शुरू की। आर्थिक परिस्थितियां आसान नहीं थीं, लेकिन मां ने बेटियों की शिक्षा में कभी कमी नहीं आने दी। मीनाक्षी और उनकी बड़ी बहन भी स्कूल से छुट्टी होते ही मां के साथ विभिन्न कार्यालयों में टिफिन पहुंचाने का काम करती थीं। इसके बाद रात में घंटों पढ़ाई कर अपने सपनों को आकार देती थीं।
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मीनाक्षी शर्मा
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
शैक्षणिक क्षेत्र में भी मीनाक्षी शुरू से ही उत्कृष्ट रही हैं। उन्होंने सीबीएसई इंटरमीडिएट परीक्षा में 96.4 प्रतिशत अंक प्राप्त कर शहर में टॉप किया था। इसके बाद वर्ष 2023 में उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में वाणिज्य स्नातक (कॉमर्स) में स्वर्ण पदक हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
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मां के साथ मीनाक्षी शर्मा
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना लेकर मीनाक्षी ने पूरी एकाग्रता के साथ तैयारी की। उन्होंने ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से अध्ययन किया और चार वर्षों तक सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी। उनका मानना है कि बड़े लक्ष्य हासिल करने के लिए समय का सही उपयोग और आत्मअनुशासन बेहद जरूरी है।
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मीनाक्षी शर्मा
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मीनाक्षी ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में भी शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन अंतिम चयन से मात्र पांच अंकों से चूक गईं। हालांकि उन्होंने इसे असफलता नहीं बल्कि सीख माना और उसी अनुभव के आधार पर उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की परीक्षा में सफलता प्राप्त कर डिप्टी कलेक्टर बनने का सपना साकार कर लिया।