मुज्जफरनगर हादसे को लेकर एक और सच सामने आया है। हरिद्वार पहुंचे यात्रियों की आंखों में मौत का मंजर साफ नजर आ रहा है। घटना के 20 घंटे बीत जाने के बाद भी यात्रियों को बार बार हादसा याद आ रहा है। वहीं यात्रियों ने खुद कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।
हादसे में लोगों के साथ छीनाझपटी भी हुई। घायल यात्रियों के सामानों को लोगों ने छीन लिया, तो कई लोग डर के मारे दोबारा अपने सामान को लेने नहीं पहुंचे। कमल किशोर बताते है कि उनको बाहर निकालते समय उनके हाथ से एक टोपी वाले युवक ने बैग लिया ओर वहां से बैग लेकर फरार हो गया।
बुजुर्ग महिला शकुंतला बताती है कि उनको बाहर निकालते समय एक युवक ने बैग के बारे में जानकारी ली और दूसरे गेट से बैग लेकर चला गया। मध्यप्रदेश के रहने वाले अखिलेश और नागेंद्र बताते है कि उनका बैग ट्रेन में ही छूट गया। हादसे के बाद उनको अपना बैग उठाने में भी डर लग रहा था।
डरे सहमे यात्री अपने साथियों से उस घटना की बातचीत कर रहे है। यात्रियों के गांव से भी उनकी कुशलता पूछने वालों के फोन लगातार आ रहे हैं। हर कोई हादसे के बाद से डर गया है। हादसे में घायलों की बात करे तो वो रेलवे के अधिकारियों को इस घटना का दोषी मानकर चल रहे है। उधर कुछ महिलाएं तेज रफ्तार को भी घटना का कारण मान रही है।
ग्वालियर के गांव अजीरा मध्यप्रदेश के रहने वाले सतीश बताते है कि वह एस7 कोच में लेटे हुए थे कि अचानक वह नीचे गिर गए और देखते ही देखते उनका कोच एक तरफ से पलट गया। करीब 15 से 20 मिनट बाद होश आने के बाद उनको ट्रेन के ऊपर बने इमरजेंसी दरवाजे से निकाला गया।